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2 रुपये के लिए शुरू हुआ खूनी सफर! जानिए हिंदुस्तान के सबसे खतरनाक सीरियल किलर 'कनपटीमार' शंकरिया की कहानी

भारत के सबसे कुख्यात और खतरनाक सीरियल किलरों में शामिल शंकरिया का नाम आज भी अपराध की दुनिया में खौफ का पर्याय माना जाता है। उसे 'कनपटीमार' के नाम से जाना जाता था। 1970 के दशक के आखिर में शंकरिया ने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में लगातार हत्याओं की वारदातों को अंजाम देकर पूरे देश को हिला दिया था।  शंकरिया ने महज 18 महीने के भीतर करीब 70 लोगों की हत्या कर दी थी। उसकी हत्या करने का तरीका इतना भयावह था कि लोग उसे 'कनपटीमार' कहने लगे। बताया जाता है कि वह अपने शिकार की कनपटी पर वार कर उनकी जान लेता था। उसकी इस क्रूर शैली ने उसे अपराध जगत में एक खतरनाक पहचान दिला दी थी।  शंकरिया की वारदातों ने राजस्थान सहित आसपास के राज्यों में भय का माहौल पैदा कर दिया था। पुलिस के लिए उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बन गया था। लगातार बढ़ती हत्याओं और लोगों में फैले डर के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।  गिरफ्तारी के बाद शंकरिया के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। उसके अपराधों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसे दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 15 मई 1979 को जयपुर सेंट्रल जेल में उसे फांसी दे दी गई।  शंकरिया का मामला भारतीय अपराध इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जाता है। उसकी कहानी आज भी अपराध विज्ञान और पुलिस अनुसंधान के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है। इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में हत्याओं को अंजाम देने वाला शंकरिया देश के कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल है।  उसके अपराधों ने यह भी दिखाया कि समय रहते अपराधियों पर नियंत्रण और प्रभावी पुलिस कार्रवाई कितनी जरूरी होती है। हालांकि शंकरिया का अंत 1979 में हो गया, लेकिन उसके नाम से जुड़ी भयावह घटनाएं आज भी लोगों की यादों में दर्ज हैं।

भारत के सबसे कुख्यात और खतरनाक सीरियल किलरों में शामिल शंकरिया का नाम आज भी अपराध की दुनिया में खौफ का पर्याय माना जाता है। उसे 'कनपटीमार' के नाम से जाना जाता था। 1970 के दशक के आखिर में शंकरिया ने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में लगातार हत्याओं की वारदातों को अंजाम देकर पूरे देश को हिला दिया था।

शंकरिया ने महज 18 महीने के भीतर करीब 70 लोगों की हत्या कर दी थी। उसकी हत्या करने का तरीका इतना भयावह था कि लोग उसे 'कनपटीमार' कहने लगे। बताया जाता है कि वह अपने शिकार की कनपटी पर वार कर उनकी जान लेता था। उसकी इस क्रूर शैली ने उसे अपराध जगत में एक खतरनाक पहचान दिला दी थी।

शंकरिया की वारदातों ने राजस्थान सहित आसपास के राज्यों में भय का माहौल पैदा कर दिया था। पुलिस के लिए उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बन गया था। लगातार बढ़ती हत्याओं और लोगों में फैले डर के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद शंकरिया के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। उसके अपराधों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसे दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 15 मई 1979 को जयपुर सेंट्रल जेल में उसे फांसी दे दी गई।

शंकरिया का मामला भारतीय अपराध इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जाता है। उसकी कहानी आज भी अपराध विज्ञान और पुलिस अनुसंधान के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है। इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में हत्याओं को अंजाम देने वाला शंकरिया देश के कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल है।

उसके अपराधों ने यह भी दिखाया कि समय रहते अपराधियों पर नियंत्रण और प्रभावी पुलिस कार्रवाई कितनी जरूरी होती है। हालांकि शंकरिया का अंत 1979 में हो गया, लेकिन उसके नाम से जुड़ी भयावह घटनाएं आज भी लोगों की यादों में दर्ज हैं।

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