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तेलंगाना के परिवहन मंत्री ने निगम के कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने का किया आग्रह, 32 में से 29 मांगें मानी

हैदराबाद, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना में तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। वे वेतन संशोधन (पीआरसी), निजीकरण रोकने और आरटीसी के सरकार में विलय सहित 32 मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच, तेलंगाना के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) कर्मचारियों से हड़ताल रद्द करने का आग्रह किया है और मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत का आह्वान किया है।
तेलंगाना के परिवहन मंत्री ने निगम के कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने का किया आग्रह, 32 में से 29 मांगें मानी

हैदराबाद, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना में तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। वे वेतन संशोधन (पीआरसी), निजीकरण रोकने और आरटीसी के सरकार में विलय सहित 32 मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच, तेलंगाना के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) कर्मचारियों से हड़ताल रद्द करने का आग्रह किया है और मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत का आह्वान किया है।

परिवहन मंत्री ने सोशल साइट एक्स पर किए पोस्ट में बयान जारी कर कहा, "मैं अपने आरटीसी के कर्मचारी भाइयों और उनके परिवार के सदस्यों से अपील करता हूं कि वे संगठन की सुरक्षा और जन कल्याण को ध्यान में रखते हुए हड़ताल को वापस ले लें। हड़ताल समस्या का समाधान नहीं है। सरकार ने उच्च पदस्थ चार अधिकारियों की एक समिति गठित की है। समिति को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह कहना गलत है कि हम समितियों के नाम पर देरी कर रहे हैं।"

मंत्री ने अधिकतर मांगें मानने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "आरटीसी कर्मचारियों द्वारा उठाए गए 32 मुद्दों में से सरकार को 29 मुद्दों पर कोई आपत्ति नहीं है। इन सभी को तत्काल हल किया जा सकता है। आरटीसी का विलय और मान्यता प्राप्त यूनियनों के चुनाव, ये दो मुद्दे अभी लंबित हैं। इन दोनों मुद्दों में कई तकनीकी पहलुओं की जांच किए जाने की आवश्यकता है। हमने इनके अध्ययन के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है। हमने चार अधिकारियों वाली समिति को सूचित किया है कि हम इन दोनों मुद्दों पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ चर्चा करेंगे। भले ही आरटीसी के विलय में देरी हो रही हो लेकिन कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख को वेतन मिल रहा है। मान्यता प्राप्त यूनियनों के चुनावों के संबंध में कहा, नेताओं के बीच आंतरिक विवाद और नेतृत्व संबंधी मुद्दे मौजूद हैं।

उन्होंने कहा, "सरकार के गठन के तुरंत बाद ही हमने 2017 का लंबित वेतन पुनरीक्षण (पीआरसी) जारी कर दिया। लंबित महंगाई भत्ता का भी बिना किसी बकाया के भुगतान कर दिया। 2013 के लंबित बॉन्ड का भी भुगतान कर दिया। पीएफ के 1205 करोड़ रुपये के बकाया को घटाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया। सीसीएस के 690 करोड़ रुपये के बकाया को घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया।

इसके अलावा, हम पीएफ और सीसीए के मद में हर महीने 75 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कर्मचारियों पर काम का कोई बोझ न पड़े, 4538 पदों पर भर्ती जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। हमने 1134 अनुकंपा नियुक्तियां की हैं, जिनका लंबे समय से इंतज़ार था। पिछली सरकार के दौरान विभिन्न कारणों से सेवा से स्थायी रूप से हटाए गए लोगों में से अब तक लगभग 250 लोगों को वापस नौकरी पर रख लिया गया है। हम सभी मुद्दों को हल करेंगे। आरटीसी अभी-अभी पटरी पर लौट रही है। ऐसा न हो कि 'रोते हुए सियार पर ताड़ का फल गिर जाए' (यानी, एक मुसीबत के बाद दूसरी मुसीबत आ जाए)।"

पोन्नम प्रभाकर ने कहा, "सभी कर्मचारी जानते हैं कि पिछली सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान आरटीसी में क्या हुआ था। आरटीसी में यात्रा करने वाले लोग गरीब, ग्रामीण और हमारी बहनें हैं। रोज़ाना यात्रा करने वाले 65 लाख लोगों में से 45 लाख महिलाएं हैं। लोग अपनी आजीविका, शिक्षा और चिकित्सा ज़रूरतों के लिए रोज़ाना आरटीसी पर निर्भर रहते हैं। सरकार की ओर से, मैं एक बार फिर अपील करता हूं कि हड़ताल न करें। आपके नेता लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। आप सरकार पर दबाव बना सकते हैं लेकिन गरीब लोगों की यात्रा में बाधा न डालें। गरीब लोग कार से यात्रा करने का खर्च नहीं उठा सकते। मैं आरटीसी परिवार के हर सदस्य से अपील करता हूं कि वे जनता को किसी भी तरह की असुविधा न पहुंचाएं। हम मिलकर लड़ें और सरकार के सहयोग से अपनी मांगें पूरी करें।

उन्होंने कहा कि सरकार आरटीसी कर्मचारियों को अपने दिल के बहुत करीब मानती है। हम आपके मुद्दों को हल करने के प्रति पूरी तरह से सकारात्मक हैं। आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी न करें। मैं एक छात्र नेता रहा हूं और मैं कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूँगा। आरटीसी ग्रामीण लोगों की जीवनरेखा है, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को किसी भी तरह की असुविधा न हो। आपके नेताओं को विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। मैं बाकी सभी कर्मचारियों से अनुरोध करता हूँ कि वे अपनी ड्यूटी पर लौट आएं और यह सुनिश्चित करें कि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।"

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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