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तेजस्वी यादव की सोच सीमित, वे लोगों की भलाई नहीं चाहते : विवेक ठाकुर

पटना, 6 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार किया। तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कहा कि हमें हराने के लिए भाजपा-एनडीए ने 40 हजार करोड़ रुपए खर्च किए।
तेजस्वी यादव की सोच सीमित, वे लोगों की भलाई नहीं चाहते : विवेक ठाकुर

पटना, 6 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार किया। तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कहा कि हमें हराने के लिए भाजपा-एनडीए ने 40 हजार करोड़ रुपए खर्च किए।

तेजस्वी यादव के बयान पर भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि यह बिहार की महिलाओं का अपमान है। यह पूरे देश में हुए स्वरोजगार को बढ़ावा देने का अपमान है, जिसकी चर्चा इस केंद्रीय बजट में भी हुई थी।

भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव विकास और सामाजिक उत्थान से जुड़ नहीं सकते। उनकी सोच सीमित है। वे सिर्फ सत्ता चाहते हैं, और वह भी अपने लिए; उन्हें लोगों की भलाई की कोई चिंता नहीं है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बर्ताव पर भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि कोई उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता। सच्चाई यह है कि वे ज्यादातर समय भारत से बाहर रहते हैं। बाकी समय में भारत में रहते हैं तो हार ही मिलती है।

जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने तेजस्वी यादव के बयान पर कहा कि मैं समझता हूं कि वह महिलाओं का अपमान कर रहे हैं। अगर उन्होंने ऐसा कहा है, तो यह महिलाओं का अपमान है। महिलाओं को समझना चाहिए कि उनके मन में महिलाओं के लिए कितना सम्मान है।

लोजपा (रामविलास) सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि योजना महिलाओं को सशक्त करने के लिए धरातल पर उतारी गई है। 2005 से ही ऐसी बहुत सारी योजनाएं महिलाओं को सशक्त करने के लिए लागू की गई हैं। अगर वे ये कह रहे हैं तो उनकी सोच बहुत छोटी है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) विधायक माधव आनंद ने तेजस्वी यादव के बयान पर कहा कि तेजस्वी यादव को हराने वाले हम लोग कौन हैं? हराने वाली तो जनता है और जिताती भी जनता है। जनता ने नकारने का काम किया है। कल ही जब वो सदन में आए और उनको बोलने का मौका दिया गया तो वो बोल ही नहीं पा रहे थे, लिखा हुआ था, उसको पढ़ नहीं पा रहे थे। हम लोगों को तो आश्चर्य होता है कि कम से कम इतने तो पढ़े-लिखे हो कि जो सामने लिखा है, उसे पढ़ें, लेकिन वो बोल नहीं पा रहे थे।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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