तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली: हसीन मस्तान
मुंबई, 24 जनवरी (आईएएनएस)। अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की बेटी हसीन मस्तान ने शनिवार को आईएएनएस से बात की। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार द्वारा कानून बनाकर तीन तलाक को खत्म करने की तारीफ की। उन्होंने इसे मुस्लिम समाज के लिए हितकारी बताया।
हसीन मस्तान ने अपने पूर्व पति के खिलाफ केस की प्रगति के बारे में बताते हुए कहा, "मैंने अपने पूर्व पति के खिलाफ केस किया है। कोर्ट में केस लड़ने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। ऐसे में इसी बीच वकील आशीष वर्मा जी से मेरी मुलाकात हुई। उन्होंने मेरा केस लिया है। एक सप्ताह में ही रिट पिटीशन हो गई। मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है कि जल्द ही इंसाफ मिलेगा।"
उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा, "अब मुझे पूरी उम्मीद है। जैसा कि मैंने कहा, मुझे न्यायपालिका और कानूनी सिस्टम पर बहुत भरोसा है। पहले मेरे पास अपना केस लड़ने के लिए सही वकील नहीं थे, लेकिन अब आशीष और दूसरे वकील फरिश्तों की तरह आए हैं। अब सरकार भी इसमें शामिल है और प्रधानमंत्री को भी इसके बारे में पता है।"
मस्तान ने अपने खिलाफ हुए अत्याचार के बारे में बात करते हुए कहा, "पहले मेरा जबरदस्ती बाल विवाह कर दिया गया था और मेरे साथ रेप की कोशिश भी हुई थी। कोई 12 साल की बच्ची से शादी कैसे कर सकता है? जिससे विवाह हुआ था, उसने मुझे मारा, मेरे बच्चे को मार डाला और मुझे इतना मानसिक रूप से परेशान किया कि मैंने आत्महत्या करने की कोशिश भी की। उसने मुझे बिना कुछ दिए तलाक दे दिया और मेरी पहचान छिपा दी गई। जब मेरी मां जिंदा थीं, तो उन्हें मेरी तरफ से बोलने के लिए कोर्ट में आने की इजाजत नहीं थी। मुझे बहुत ज्यादा मानसिक रूप से परेशान किया गया।"
उन्होंने तीन तलाक को खत्म होने के मुस्लिम समाज के लिए हितकारी बताते हुए कहा, "यह बहुत फायदेमंद रहा है। देखिए, इस्लाम में 'ट्रिपल तलाक' जैसे मुद्दों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। लोग गलत तरीके से तलाक दे रहे थे, जो सच्ची इस्लामी शिक्षाओं के हिसाब से नहीं था। जब पीएम मोदी ने इसका गलत इस्तेमाल देखा, तो उन्होंने इस पर ध्यान दिया। इस मामले को बहुत सावधानी से संभाला गया और इस पर पूरा ध्यान दिया गया। इसी वजह से महिलाओं को राहत मिली और अब लोग समझते हैं कि तलाक का इस तरह से गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने सरकार की तारीफ करते हुए कहा, "अगर मुस्लिम विरोधी भावना होती, तो मैं आज यहां नहीं होती। मैं पीएमओ ऑफिस तक नहीं पहुंच पाती और बिहार के एमपी प्रदीप कुमार सिंह मेरी मदद नहीं करते।"
उन्होंने कहा, "पहले इंसानियत आती है, फिर धर्म। आप हिंदू हैं, मैं मुसलमान हूं इससे क्या फर्क पड़ता है? धर्म बाद में आता है। इंसानियत पहले आती है। हम सब इंसान हैं। अगर किसी को चोट लगती है या कोई तकलीफ में है, तो हमें यह नहीं कहना चाहिए कि 'वे हिंदू हैं' या 'वे मुसलमान हैं।' वे एक इंसान हैं और हमें इंसानियत के नाते ही जवाब देना चाहिए।"
--आईएएनएस
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