तीन-चार बच्चों पर शोर मचाने वालों को भागवत का बयान पढ़ना चाहिए : मौलाना रजवी
बरेली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमीयत के प्रेसिडेंट मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान और देश में मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मोहन भागवत द्वारा तीन बच्चे पैदा करने की बात कहने से मुस्लिम समुदाय की स्थिति और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि बच्चे हों या न हों, यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमतों में से एक है और इस पर किसी को सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। जो लोग मुसलमानों के तीन-चार बच्चे पैदा करने को लेकर शोर मचाते रहते हैं, उन्हें मोहन भागवत का बयान ध्यान से सुनना और पढ़ना चाहिए।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लेकर संविधान में जो व्यवस्था की गई है, वह पूरी तरह से वाजिब और स्पष्ट है। संविधान के अनुसार, जिन राज्यों में यूसीसी लागू किया जाना है, वहां पहले जनता से राय ली जानी चाहिए और बिना सहमति के इसे लागू नहीं किया जा सकता।
उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने के लिए जस्टिस रंजना देसाई समिति का गठन किया, लेकिन उस समिति में अनुसूचित जनजाति, कबायली समाज और अल्पसंख्यकों से कोई राय नहीं ली गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में एकतरफा तरीके से यूसीसी लागू कर दिया गया, जो संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है। इस तरह से भारत में कानून नहीं बनाया जा सकता। यदि इस प्रकार की तानाशाही अपनाई जाएगी तो यह न केवल संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ होगी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करेगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि वह खुलेआम मुस्लिम विरोधी बयानबाजी कर रहे हैं और लगातार मुसलमानों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मुसलमानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना चाहते हैं। इसी मानसिकता के तहत वह यह बयान देते हैं कि अगर कोई रिक्शा चालक पांच रुपए मांगता है तो उसे केवल चार रुपए ही दिए जाएं। इस तरह के बयान समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
मौलाना रजवी ने यह भी आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री से जुड़ा विवादित वीडियो जम्हूरियत का गला घोंटने और लोकतंत्र का मजाक उड़ाने वाला कदम था। किसी लोकतांत्रिक देश में इस तरह की राजनीति नहीं चल सकती।
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमानों के बिना भारत अधूरा है। रजवी ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री ऐसे बयानों को नकारते हुए लगातार मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ और उकसाने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की।
--आईएएनएस
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