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'टीम में लड़ने का जज्बा नहीं दिखा, यह शर्मनाक हार', ऑस्ट्रेलिया के निराशाजनक प्रदर्शन पर भड़के डेविड वॉर्नर

'टीम में लड़ने का जज्बा नहीं दिखा, यह शर्मनाक हार', ऑस्ट्रेलिया के निराशाजनक प्रदर्शन पर भड़के डेविड वॉर्नर
'टीम में लड़ने का जज्बा नहीं दिखा, यह शर्मनाक हार', ऑस्ट्रेलिया के निराशाजनक प्रदर्शन पर भड़के डेविड वॉर्नर

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की करारी हार के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और टीम में बदलाव की मांग तेज हो गई है। पूर्व दिग्गज खिलाड़ी डेविड वॉर्नर ने इस हार को शर्मनाक और ऑस्ट्रेलियाई मूल्यों के खिलाफ बताया है।

केप टाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर खेले गए तीसरे टेस्ट के पांचवें दिन ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 288 रनों की जरूरत थी लेकिन ऐसा कभी नहीं लगा कि वह लक्ष्य हासिल कर पाएंगे। पहले ही ओवर में दो विकेट गंवाने के बाद मेहमान टीम 18 ओवर में 42 रन पर 6 विकेट खो चुकी थी और अंततः पूरी टीम महज 111 रनों पर सिमट गई। तीसरे टेस्ट को जीतकर साउथ अफ्रीका ने तीन मैचों की सीरीज को 2-1 से जीता।

इस नतीजे के बाद साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए आईसीसी पुरुष टेस्ट टीम रैंकिंग में नंबर 1 स्थान हासिल किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में भी खिसककर तीसरे नंबर पर आ गया है। 'फॉक्स स्पोर्ट्स' पर बात करते हुए वॉर्नर ने कहा, "मैं बहुत निराश हूं। यह बहुत बुरा है। यह ऑस्ट्रेलियाई मूल्यों के खिलाफ है। टीम में लड़ने का कोई जज्बा ही नहीं दिखा। यह शर्मनाक है। 288 रन का लक्ष्य था, आप एक टेस्ट मैच जीत सकते थे, सीरीज जीत सकते थे। सब कुछ दांव पर लगा था। क्या वह इसी तरह खेलते हैं?"

ऑस्ट्रेलिया के लिए साउथ अफ्रीका का यह दौरा, जिसकी शुरुआत डरबन में मैट रेनशॉ की बदौलत मिली शानदार जीत से हुई थी, केपटाउन में पांचवें दिन एक शर्मनाक अंत के साथ खत्म हुआ। बल्लेबाजी में एक बार फिर वही पुरानी कमजोरी देखने को मिली, जिसके चलते ऑस्ट्रेलिया को 1,300 से अधिक दिनों में पहली बार किसी टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा।

वॉर्नर ने कहा, "मुझे लगता है कि यह बेहद खराब प्रदर्शन है। पूरी सीरीज में बल्लेबाजों ने गेंदबाजों को निराश किया है। हां, पहले टेस्ट में मैट रेनशॉ ने लड़ने का जज्बा दिखाया था, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का प्रदर्शन शर्मनाक रहा। बल्लेबाजों को पता होना चाहिए था कि यह खिलाड़ी (रबाडा) पूरी ताकत के साथ गेंदबाजी करेगा। उन्होंने ऐसा ही किया।"

तीनों टेस्ट मैचों में ऐसा देखने को मिला कि जीतने वाली टीम शुरुआत में मुश्किल में थी, लेकिन बाद में शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। डरबन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया एक समय 124/6 के स्कोर पर संघर्ष कर रहा था, लेकिन इसके बाद टीम ने संभलते हुए पहली पारी में 390 रन बनाए। यही बड़ा स्कोर उनकी 214 रन की जीत की मजबूत नींव साबित हुआ।

इसी तरह, इसके बाद गेबेरहा में खेले गए टेस्ट में साउथ अफ्रीका का स्कोर 110/6 था, लेकिन उन्होंने 425/9 (पारी घोषित) का स्कोर खड़ा किया और एक पारी और 31 रनों से जीत हासिल की। ​​केप टाउन टेस्ट में साउथ अफ्रीका की पहली पारी 203/1 से लड़खड़ा गई और पूरी टीम 329 रनों पर सिमट गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने 429 रन बनाने के साथ ही 100 रनों की बढ़त भी हासिल की। दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका 131/4 के स्कोर के साथ मुश्किल में दिख रही थी, लेकिन टीम के गेंदबाजों ने चौथी पारी में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को जीत दिलाई।

--आईएएनएस

एसएम/पीएम

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