पटना में शिक्षकों का लोकभवन मार्च: विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 का विरोध, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारी पकड़े
बिहार की राजधानी पटना में विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को लेकर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। शनिवार, 10 अक्टूबर को बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी नए कानून के विरोध में लोकभवन मार्च के लिए निकले। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
यह मार्च बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित किया गया। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शिक्षक और कर्मचारी जेडी वीमेंस कॉलेज में जुटे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नए अधिनियम को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपना चाहते थे। शिक्षकों का कहना है कि नए अधिनियम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। संघर्ष मोर्चा ने विशेष रूप से अधिनियम की धारा-3 पर आपत्ति जताई है।
संगठन ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के जरिए विश्वविद्यालयों की संरचना, क्षेत्रीय अधिकारिता और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करने की शक्तियां बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, महिला महाविद्यालयों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल करने की संभावित योजना पर भी सवाल उठाए गए हैं।
संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन के अनुसार, 16 अक्टूबर तक शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। साथ ही, रोजाना दोपहर 2 बजे से 2:30 बजे तक संस्थानों के मुख्य द्वार के बाहर मानव शृंखला बनाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया जाएगा।फिलहाल, इस पूरे मामले में शिक्षकों की प्रमुख मांग विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखना और विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 पर पुनर्विचार करना है।

