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तटरक्षक बल का तेज गश्ती पोत ‘अचल’, समुद्री सुरक्षा होगी और सशक्त

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) का नव-नियुक्त तेज गश्ती पोत आईसीजीएस अचल उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित अपने बेस बंदरगाह वाडिनार पहुंचा है। यह भारतीय तटरक्षक बल की ऑपरेशनल क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि का एक प्रतीक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों तथा स्थानीय प्रशासन एवं क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
तटरक्षक बल का तेज गश्ती पोत ‘अचल’, समुद्री सुरक्षा होगी और सशक्त

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) का नव-नियुक्त तेज गश्ती पोत आईसीजीएस अचल उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित अपने बेस बंदरगाह वाडिनार पहुंचा है। यह भारतीय तटरक्षक बल की ऑपरेशनल क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि का एक प्रतीक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों तथा स्थानीय प्रशासन एवं क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

गौरतलब है कि पोत के आगमन को क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आईसीजीएस अचल को 9 मई 2026 को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। 51 मीटर लंबा यह अत्याधुनिक फास्ट पेट्रोल वेसल (एफपीवी) नवीनतम नौवहन, संचार और निगरानी प्रणालियों से लैस है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह पोत समुद्र में लंबी अवधि तक लगातार गश्त करने, त्वरित प्रतिक्रिया देने और विभिन्न मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम है।

इसकी उच्च गति और उन्नत परिचालन क्षमताएं इसे समुद्री सुरक्षा अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती हैं। भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र देश की समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। गुजरात का विस्तृत समुद्री तट, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की निकटता तथा समुद्री गतिविधियों की अधिकता इस क्षेत्र को रणनीतिक महत्व प्रदान करती है। ऐसे में आईसीजीएस अचल की वाडिनार में तैनाती समुद्री सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती प्रदान करेगी और तटीय निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

पोत की तैनाती से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में निरंतर निगरानी क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति, सुरक्षा चुनौती या संदिग्ध गतिविधि पर शीघ्र प्रतिक्रिया देना संभव होगा। यह पोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, अवैध घुसपैठ की रोकथाम, तस्करी विरोधी अभियानों, समुद्री कानूनों के प्रवर्तन तथा राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा समुद्र में कार्यरत मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संकटग्रस्त नौकाओं को सहायता प्रदान करने में भी यह पोत अहम योगदान देगा।

भारतीय तटरक्षक बल लंबे समय से देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियानों, प्रदूषण नियंत्रण तथा मानवीय सहायता कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। आईसीजीएस अचल के बेड़े में शामिल होने से इन अभियानों को और अधिक गति और दक्षता मिलेगी। यह पोत आधुनिक सेंसर और निगरानी उपकरणों की सहायता से समुद्री क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नजर रख सकेगा तथा आवश्यक होने पर तत्काल कार्रवाई कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीजीएस अचल की तैनाती भारत सरकार द्वारा तटीय और समुद्री सुरक्षा को दी जा रही प्राथमिकता का स्पष्ट प्रमाण है। हाल के वर्षों में समुद्री सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने, तटरक्षक बल के बेड़े का विस्तार करने और निगरानी क्षमताओं को उन्नत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसी क्रम में यह नया पोत उत्तर-पश्चिम समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आईसीजीएस अचल का वाडिनार में आगमन केवल एक नए पोत की तैनाती नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पोत देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा, तटीय सुरक्षा को मजबूत करने तथा समुद्री क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सतर्कता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम समुद्री क्षेत्र में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन उपस्थिति और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएस

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