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तमिलनाडु : कन्याकुमारी में 79 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई के लिए 850 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश

चेन्नई, 30 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत कोडायार और पट्टनमकाल सिंचाई प्रणालियों के अंतर्गत आने वाले पेचीपराई, पेरुंचानी, चित्तर-I और चित्तर-II बांधों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। यह प्रक्रिया 1 जून 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी। सरकार ने इस अवधि को इसलिए तय किया है ताकि पूरे कृषि मौसम के दौरान किसानों को पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
तमिलनाडु : कन्याकुमारी में 79 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई के लिए 850 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश

चेन्नई, 30 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने कन्याकुमारी ज़िले में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत कोडायार और पट्टनमकाल सिंचाई प्रणालियों के अंतर्गत आने वाले पेचीपराई, पेरुंचानी, चित्तर-I और चित्तर-II बांधों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। यह प्रक्रिया 1 जून 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी। सरकार ने इस अवधि को इसलिए तय किया है ताकि पूरे कृषि मौसम के दौरान किसानों को पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पानी छोड़ने की प्रक्रिया जल उपलब्धता और सिंचाई की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जाएगी। इसके तहत 850 क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा जाएगा ताकि नहरों और अन्य सिंचाई माध्यमों के जरिए खेतों तक पर्याप्त मात्रा में जल पहुंच सके। यह कदम विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कृषि पूरी तरह से सिंचाई पर निर्भर है और वर्षा की अनिश्चितता के कारण किसानों को अक्सर पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।

इस फैसले से कन्याकुमारी ज़िले के कई तालुकों में राहत मिलने की उम्मीद है। इनमें थोवलई, अगस्त्येश्वरम, कलकुलम, किलियूर, तिरुवट्टार और विलावन्कोड जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों के अंतर्गत आने वाले गांवों में लगभग 79 हजार एकड़ कृषि भूमि को इस पानी से सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। इससे धान, केला, नारियल और अन्य प्रमुख फसलों की खेती को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है।

यह आदेश जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल मौजूदा कृषि उत्पादन को स्थिरता मिलेगी बल्कि आने वाले कृषि सीजन में उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र में जल प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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