स्वदेशी युद्धक ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकसित करने की तैयारी
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। भारत की रक्षा एवं एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमटेल एवियोनिक्स ने स्वदेशी युद्धक ड्रोन निर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विस्तार की घोषणा की है। स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की योजना बनाई गई है। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य भारत में स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस नवाचार को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की जरूरत को रेखांकित किया है। रक्षा मंत्री ने ऐसे सिस्टम की बात कही जिसमें हम पूरी तरह से आत्मनिर्भर हों। रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) तथा हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म में योगदान के आधार पर कंपनी ने अब मानव रहित प्रणालियों, ड्रोन व काउंटर ड्रोन तकनीकों के लिए विशेष इकाइयां स्थापित करने का फैसला किया है। इसके अलावा लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट सॉल्यूशन पर भी काम किया जाएगा।
भारत सरकार की पहल को प्रेरणादायी बताते हुए कंपनी का कहना है कि ड्रोन के क्षेत्र यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारत का रक्षा तंत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्रालय ने भी निजी क्षेत्र, एमएसएमई तथा स्टार्ट-अप से भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया है। सैमटेल एवियोनिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक पुनीत कौरा ने दिल्ली में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 के अंतिम दिन बताया कि कंपनी ने एक समर्पित ड्रोन प्रभाग की स्थापना की है। यह प्रभाग पूरी तरह स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करेगा और अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आधारित होगा।
उन्होंने कहा कि जैसा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मेलन में रेखांकित किया है, मानव रहित प्रणालियों में आत्मनिर्भर क्षमताओं का निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। हमारी कार्ययोजना में लंबी अवधि तक उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन का विकास, मजबूत रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल अवसंरचना की स्थापना शामिल है। इससे भारत के रक्षा तंत्र को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। इस पहल के तहत कंपनी व्यापक जीवनचक्र समर्थन प्रणाली विकसित करेगी, जिससे ड्रोन प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बनी रहे।
इसके साथ ही सैमटेल अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है और निम्न पृथ्वी कक्षा तथा छोटे उपग्रहों के विकास की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रही है। उम्मीद है कि कंपनी का पहला अंतरिक्ष कार्यक्रम आने वाले महीनों में शुरू हो जाएगा।
पुनीत कौरा ने कहा कि भारत का रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां स्वदेशी क्षमताओं के विकास और घरेलू औद्योगिक आधार को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग, एमएसएमई और नवाचार आधारित संस्थाओं के बीच सहयोग आत्मनिर्भरता हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इस रणनीतिक विस्तार के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसरों का लाभ उठाते हुए मजबूत तंत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उनका कहना है कि लगभग 50 वर्षों के अनुभव वाला यह संस्थान देश की एवियोनिक्स रक्षा, एयरोस्पेस और रेलवे क्षेत्रों के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का प्रमुख प्रदाता बना है। अब सशस्त्र बलों व भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव रहित प्रणालियों तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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