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पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा खत, की ये अपील

कोलकाता, 6 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर बड़ा अनुरोध किया है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चाय बागानों और सिनकोना बागानों के रोजगार रिकॉर्ड को पहचान और निवास के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा खत, की ये अपील

कोलकाता, 6 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर बड़ा अनुरोध किया है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चाय बागानों और सिनकोना बागानों के रोजगार रिकॉर्ड को पहचान और निवास के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।

सुवेंदु अधिकारी ने पत्र में उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिलों के चाय बागान श्रमिकों, वनवासियों और बागान मजदूरों की समस्याओं का जिक्र किया। उनका कहना है कि ये हाशिए पर रहने वाले समुदाय लंबे समय से दस्तावेजों की कमी के कारण मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित रह जाते हैं। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चाय और सिनकोना बागान हैं, जो देश के चाय निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और लाखों श्रमिकों को रोजगार प्रदान करते हैं। फिर भी ये मजदूर बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रह जाते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि दार्जिलिंग से लोकसभा सांसद राजू बिस्टा ने भी 29 नवंबर 2025 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इसी संबंध में पत्र लिखा था। उसमें 2002 से पहले के बागान रोजगार रिकॉर्ड को मान्यता देने की मांग की गई थी। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि एसआईआर अभियान समावेशी और सटीक मतदाता सूची बनाने का अच्छा अवसर है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के अनुरूप है। इन समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित रखने वाली व्यवस्थागत बाधाओं को अब दूर करना जरूरी है।

पत्र में औपनिवेशिक काल से लेकर स्वतंत्र भारत तक की स्थिति का उल्लेख है। इन बागान श्रमिकों के पास ज्यादातर औपचारिक सरकारी दस्तावेज नहीं रहे। उनका एकमात्र विश्वसनीय प्रमाण बागानों द्वारा रखे गए रोजगार रिकॉर्ड ही हैं, जिनमें नौकरी, निवास और परिवार के विवरण दर्ज होते हैं। ये रिकॉर्ड पहले श्रम विवादों और कल्याण योजनाओं में प्रमाण के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने वन अधिकार मान्यता अधिनियम 2006 का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में इसका कार्यान्वयन बहुत कम हुआ है, जिससे वन समुदायों को भूमि अधिकार नहीं मिल पाए। राज्य सरकार और प्रशासन इनकी समस्याओं के प्रति उदासीन रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अयोग्य मतदाताओं के हित में एसआईआर रोकने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखे, लेकिन इन योग्य नागरिकों की परेशानियों पर कभी ध्यान नहीं दिया।

उनका मानना है कि बागान रिकॉर्ड को मान्यता देने से सामाजिक न्याय मजबूत होगा और संविधान के समानता के सिद्धांतों का पालन होगा। इन क्षेत्रों में शैक्षिक अवसर भी सीमित रहे हैं, जिससे दस्तावेज बनाने में और दिक्कतें आती हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर तुरंत सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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