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गुजरात : सूरत रेलवे स्टेशन बनेगा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, 1,500 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

सूरत, 25 मार्च (आईएएनएस)। सूरत रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब (एमएमटीएच) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर के सभी प्रमुख परिवहन साधनों रेल, बस और मेट्रो को एकीकृत कर यात्रियों को सुगम, तेज और सुविधाजनक यात्रा अनुभव देना है।
गुजरात : सूरत रेलवे स्टेशन बनेगा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, 1,500 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

सूरत, 25 मार्च (आईएएनएस)। सूरत रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब (एमएमटीएच) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर के सभी प्रमुख परिवहन साधनों रेल, बस और मेट्रो को एकीकृत कर यात्रियों को सुगम, तेज और सुविधाजनक यात्रा अनुभव देना है।

करीब 1,500 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का पहला चरण तेजी से निर्माणाधीन है और दिसंबर 2027 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के बड़े ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा है, जिसमें वंदे भारत ट्रेन, अमृत भारत योजना, कवच सुरक्षा प्रणाली और स्टेशन रिडेवलपमेंट शामिल हैं।

इसी तरह अहमदाबाद में भी एमएमटीएच मॉडल पर काम किया जा रहा है। पश्चिम रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (सीपीआरओ) विनीत अभिषेक ने कहा की कि सूरत स्टेशन को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें बस, मेट्रो और रेलवे सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, ताकि यात्रियों को एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मिल सकें और सफर पूरी तरह सुगम हो।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 1,500 करोड़ रुपए है, जिसमें से पहले फेज पर लगभग 980 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं और करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हमारा लक्ष्य है कि दिसंबर 2027 तक पहला फेज पूरी तरह तैयार हो जाए।

सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि इसमें एलिवेटेड रोड के जरिए सभी प्लेटफॉर्म को जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को स्टेशन तक आने-जाने में आसानी होगी और ट्रैफिक की समस्या भी कम होगी। स्टेशन को आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है, ताकि बढ़ती यात्री संख्या को संभाला जा सके।

उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ सूरत ही नहीं, बल्कि पूरे रेलवे नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, समय की पाबंदी बढ़ेगी और यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा।

--आईएएनएस

एसडी/एबीएम

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