सुप्रिया श्रीनेत ने एनजीओ 'ग्राम' के सर्वे की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
लखनऊ, 2 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एनजीओ ‘ग्राम’ के सर्वे को अविश्वनीय करार दिया। यह सर्वे चुनाव आयोग की ओर से कराया गया था। सर्वे का मुख्य मकसद कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानकारी अर्जित करना था।
सुप्रिया श्रीनेत ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि एनजीओ ग्राम के संस्थापक बाला सुब्रमणयम है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में भी काम कर चुके हैं। वो प्रधानमंत्री के कट्टर भक्त हैं। प्रधानमंत्री के तारीफों के संग्रहण को उन्होंने एक पुस्तक का भी रूप दे दिया है। यह पुस्तक उन्होंने गत वर्ष लिखी थी। ऐसे लोगों से आप सर्वे कराकर विश्वसनीयता की उम्मीद भला कैसे कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वे में दावा किया गया है कि लोग चुनावी प्रणाली से पूरी तरह से संतुष्ट हैं। उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं है। सब भ्रामक बातें कही गई हैं, जिनमें बिल्कुल भी सत्यता नहीं है। मैं एक बात दावे के साथ कह सकती हूं कि आप जमीनी स्तर पर लोगों से पूछ लीजिए। लोग बता देंगे कि वो देश की मौजूदा चुनावी प्रणाली से खुश नहीं हैं। ईवीएम से खुश नहीं हैं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मौजूदा देश में बड़ी संख्या में लोगों के मन में चुनावी प्रणाली को लेकर असंतोष है। लोग चुनावी प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों को ईवीएम पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, लेकिन अफसोस की बात है कि सर्वे में दावा किया जा रहा है कि लोगों के मन में चुनावी प्रणाली को लेकर किसी भी प्रकार का कोई सवाल नहीं है। लोग ईवीएम से खुश हैं. लेकिन किसी को यह नहीं पता है कि जिस व्यक्ति के संरक्षण में ये सर्वे हुआ है, वो प्रधानमंत्री कार्यालय में काम कर चुका है। ऐसी स्थिति में आप भला इस सर्वे को कैसे मान्य और विश्वसनीय मान सकते हैं।
उन्होंने देवकीनंदन ठाकुर के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता है कि ये कौन है और क्या बयान दिया है। लेकिन, केंद्र की मोदी सरकार को यह देखना होगा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों के साथ क्या हो रहा है। वहां पर लगातार हिंदू समुदाय के लोगों की हत्याएं हो रही हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कट्टरवादी ताकतों की ओर से निशाना बनाना या जा रहा है, जिसमें प्रमुख रूप से हिंदू, ईसाई और बोद्ध शामिल हैं। लेकिन, अफसोस की बात है कि केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक इस संबंध में किसी भी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है। केंद्र सरकार को इस संबंध में तत्काल कदम उठाना चाहिए, ताकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
उन्होंने कहा कि भारत में ये लोग हिंदुओं के नाम पर राजनीति करते हैं। हिंदुओं के नाम पर वोट हासिल करते हैं, लेकिन जहां पर सही मायने में हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रहा है, उस पर वो किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं कर रहे हैं और न ही कोई कदम उठा रहे हैं।
वहीं, शाहरुख की टीम में बांग्लादेशी खिलाड़ी के खरीदने को लेकर भाजपा की आपत्ति जताए जाने का भी कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सीधा सवाल अगर किसी से पूछा जाना चाहिए, तो वो जय शाह हैं। आखिर जय शाह ने इस नीलामी प्रक्रिया में बांग्लादेश के खिलाड़ियों को क्यों शामिल किया गया। हम पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल नहीं करते, तो जय शाह ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों को टीम में क्यों डाला। इस संबंध में जय शाह से सवाल किया जाना चाहिए। उन्हें सामने आकर जवाब देना चाहिए कि आखिर क्यों बांग्लादेशी खिलाड़ियों को इस नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया। इस संबंध में इन लोगों को तत्काल अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। अफसोस ये ऐसा नहीं करेंगे।
--आईएएनएस
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