सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: ब्रेकअप के बाद सहमति से बने संबंध रेप नहीं, शादी का झूठा वादा हो तो अलग मामला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वयस्क युवक और युवती के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल रिश्ता टूटने के बाद रेप का मामला नहीं माना जा सकता। अदालत ने शादी का वादा करके संबंध बनाने के आरोप से जुड़े मामले में एक व्यक्ति को आरोपों से मुक्त कर दिया।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि प्रेम संबंध में आपसी सहमति से बने शारीरिक रिश्ते को ब्रेकअप के बाद अपने आप आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। हर टूटे हुए रिश्ते को रेप का मामला मानना कानून की सही व्याख्या नहीं होगी।हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने शुरुआत से ही शादी करने का झूठा वादा किया था या धोखे से दूसरे व्यक्ति की सहमति हासिल की थी, तो ऐसे मामले की परिस्थितियां अलग होंगी। इसमें यह जांचना जरूरी है कि सहमति वास्तव में धोखे के आधार पर दी गई थी या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की 5 प्रमुख टिप्पणियां
1. ब्रेकअप के बाद रेप के आरोप की धमकी देना उचित नहीं
अदालत के अनुसार, केवल रिश्ता खत्म करने के फैसले के कारण किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना उचित नहीं है। रेप के आरोप का डर दिखाकर किसी को जबरन रिश्ते में बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
2. रेप कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए
यौन अपराधों से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल किसी को परेशान करने या बदला लेने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने सहमति से बने रिश्ते और शुरुआत से ही धोखे या जबरदस्ती के आधार पर बनाए गए संबंधों के बीच अंतर को महत्वपूर्ण बताया।
3. आरोपों और सबूतों की निष्पक्ष जांच जरूरी
ऐसे मामलों में केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय उपलब्ध सबूतों और मामले की वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए। यदि यौन हिंसा, जबरदस्ती या धोखे के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
4. यौन हिंसा के मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
अदालत की टिप्पणी का उद्देश्य वास्तविक यौन अपराधों को नजरअंदाज करना नहीं है। जहां जबरदस्ती, यौन हिंसा या धोखे के आधार पर सहमति लेने के प्रमाण मिलते हैं, वहां दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
5. शिकायत करने वाली महिलाओं की परिस्थितियों को भी समझना जरूरी
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि कई महिलाएं परिवार की प्रतिष्ठा, सामाजिक बदनामी और दूसरे दबावों के कारण यौन हिंसा की शिकायत दर्ज कराने से हिचकती हैं। इसलिए उनकी परेशानियों और परिस्थितियों को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।
क्या है इस टिप्पणी का मतलब?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य आशय यह है कि सहमति से बने वयस्क संबंध का बाद में टूट जाना अपने आप रेप का अपराध साबित नहीं करता। वहीं, यदि शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और उसी धोखे के आधार पर शारीरिक संबंध बनाए गए, तो मामले की कानूनी जांच अलग तरीके से की जा सकती है।इसलिए हर मामले में यह देखना जरूरी होगा कि सहमति किन परिस्थितियों में दी गई थी और क्या शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा था।

