सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, तमिलनाडु में गाय-बछड़ों के वध संबंधी निर्देश पर फिलहाल राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को बकरीद समेत किसी भी दिन तमिलनाडु में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में सुधार (Correction) की आवश्यकता है और प्रथम दृष्टया यह आदेश मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं प्रतीत होता।
यह फैसला तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर आया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया था कि अदालत ने राज्य में लागू कानून की सीमा से आगे जाकर निर्देश जारी कर दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राज्य में गोवंश के वध को लेकर पहले से स्पष्ट कानूनी व्यवस्था मौजूद है। सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में और निर्धारित शर्तों के आधार पर गोवंश के वध की अनुमति दी जा सकती है। ऐसे में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा पूर्ण प्रतिबंध का निर्देश देना कानून के दायरे से बाहर है।
सरकार ने यह भी कहा कि किसी कानून का विस्तार या उसमें बदलाव करना विधायिका का अधिकार है और अदालत को मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुरूप ही निर्देश जारी करने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में सुधार की जरूरत है। अदालत ने फिलहाल उस आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए मामले की आगे सुनवाई करने का निर्णय लिया।
इस अंतरिम आदेश का मतलब है कि अंतिम फैसला आने तक हाईकोर्ट का निर्देश लागू नहीं होगा और राज्य में पहले से लागू कानूनी व्यवस्था प्रभावी रहेगी।
क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश?
मद्रास हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि बकरीद सहित किसी भी दिन राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर प्रभावी रोक सुनिश्चित की जाए। अदालत ने प्रशासन को कानून का सख्ती से पालन कराने और अवैध वध रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। कई संगठनों ने फैसले का स्वागत किया, जबकि राज्य सरकार ने इसे मौजूदा कानून के विपरीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
कानूनी पहलू क्या है?
भारत में गोवंश वध को लेकर एक समान कानून नहीं है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय कानूनों के अनुसार अलग-अलग प्रावधान लागू हैं। तमिलनाडु में भी गोवंश के वध को लेकर विशेष कानूनी नियम मौजूद हैं, जिनके तहत कुछ शर्तों के आधार पर अनुमति दी जाती है।
इसी आधार पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि हाईकोर्ट का आदेश मौजूदा वैधानिक प्रावधानों से आगे बढ़कर दिया गया है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट का निर्देश लागू नहीं रहेगा। अब इस मामले में शीर्ष अदालत विस्तृत सुनवाई करेगी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी।
इस मामले पर अब देशभर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल तमिलनाडु के कानूनों बल्कि न्यायिक अधिकार क्षेत्र और राज्य सरकार की शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों से भी जुड़ा हुआ है।

