मणिपुर के राहत शिविरों में 640 मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 मामलों की रिपोर्ट तलब
मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद बनाए गए राहत शिविरों में हुई मौतों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने 8 जिलों के राहत शिविरों में दर्ज 25 संदिग्ध अप्राकृतिक मौतों की विस्तृत रिपोर्ट मणिपुर के मुख्य सचिव से तलब की है। इनमें एक कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम और जांच की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
640 मौतों का रिकॉर्ड, सिर्फ 20 पोस्टमार्टम
सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, आठ जिलों के राहत शिविरों में अब तक 640 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। कोर्ट ने पूछा कि जिन मामलों में आपराधिक केस दर्ज किए गए थे, उनमें भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया सभी मामलों में क्यों नहीं हुई।पीठ ने मुख्य सचिव से 25 अप्राकृतिक मौतों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें मौत की परिस्थितियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौत के कारणों से जुड़े अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा है कि राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
राहत शिविरों में सुरक्षा और सुविधाओं पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और रोजमर्रा की जरूरी चीजें उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। कोर्ट ने राज्य से उन मामलों में एफआईआर और जांच की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, जहां अप्राकृतिक मौतें सामने आई हैं।सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य के अधिकारियों से यह भी पूछा कि पहले मांगी गई जानकारी पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।
यौन हिंसा के मामलों की सुनवाई के दौरान मामला उठा
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और ट्रायल से संबंधित याचिकाओं पर हो रही थी। इसी दौरान अदालत के सामने राहत शिविरों में हुई मौतों का मुद्दा आया।अदालत ने पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। समिति की रिपोर्ट में राहत शिविरों में हुई मौतों और प्रभावित परिवारों को दिए गए मुआवजे से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
2023 से जारी है जातीय संघर्ष
मणिपुर में 3 मई 2023 को कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। हिंसा के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए और अलग-अलग राहत शिविरों में रहने लगे। सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही में हिंसा के दौरान हुई यौन हिंसा, राहत, पुनर्वास और जांच से जुड़े कई मुद्दों पर सुनवाई हो रही है।गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने खास तौर पर 25 अप्राकृतिक मौतों की जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। अब मणिपुर के मुख्य सचिव को इन मामलों की विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी। इससे राहत शिविरों में हुई मौतों और वहां रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

