Samachar Nama
×

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर बड़ा फैसला, मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की याचिका खारिज; वीडियो में कहा- भविष्य में समीक्षा का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर बड़ा फैसला, मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की याचिका खारिज; वीडियो में कहा- भविष्य में समीक्षा का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है, जिसके चलते फांसी को असंवैधानिक घोषित किया जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में नए वैज्ञानिक, मेडिकल या अनुभवजन्य सबूत सामने आने पर इस मुद्दे की दोबारा संवैधानिक समीक्षा की जा सकती है।

याचिकाकर्ता की ओर से फांसी की प्रक्रिया को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई थी। इसके स्थान पर मौत की सजा लागू करने के लिए जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने, बिजली से करंट देने और गैस चैंबर जैसे वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने की मांग की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि मौत की सजा पाए व्यक्ति की गरिमा और कम से कम पीड़ा सुनिश्चित करने के लिए फांसी के बजाय अधिक मानवीय तरीका अपनाया जाना चाहिए।

तीन जजों की पुरानी व्यवस्था पर दोबारा विचार से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की संवैधानिक वैधता से जुड़े पहले के तीन जजों की बेंच के फैसले को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग भी स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं है, जिससे पुराने फैसले की दोबारा बड़ी बेंच से समीक्षा कराई जाए। इस फैसले के बाद फिलहाल भारत में मौत की सजा लागू करने के लिए फांसी की मौजूदा कानूनी व्यवस्था जारी रहेगी।

भविष्य में बदल सकता है फैसला

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भविष्य के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। अदालत ने कहा कि अगर आगे चलकर ऐसे ठोस वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या अनुभवजन्य प्रमाण सामने आते हैं, जिनसे यह साबित हो कि फांसी को लेकर पहले के फैसले का वैज्ञानिक आधार बदल चुका है, तो संवैधानिक समीक्षा की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में इस मुद्दे पर सुनवाई की संभावना समाप्त हो गई है।

केंद्र बना सकता है विशेषज्ञ समिति

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए भी एक विकल्प खुला रखा है। अदालत ने कहा कि केंद्र चाहे तो विशेषज्ञों की समिति गठित कर मौत की सजा लागू करने के मौजूदा तरीके की व्यापक समीक्षा करा सकता है। समिति वैज्ञानिक और चिकित्सकीय पहलुओं के आधार पर यह जांच सकती है कि क्या कोई वैकल्पिक तरीका ऐसा है, जिससे दोषी को अनावश्यक पीड़ा कम हो और उसकी गरिमा को अधिक बेहतर तरीके से बनाए रखा जा सके।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फांसी को मौत की सजा लागू करने के वैध तरीके के रूप में बरकरार रखा है, लेकिन साथ ही वैज्ञानिक शोध और भविष्य में सामने आने वाले नए सबूतों के आधार पर बदलाव की संभावना खुली रखी है। अदालत का यह फैसला मौत की सजा की प्रक्रिया में मानवीय गरिमा और पीड़ा के सवाल पर आगे की बहस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Share this story

Tags