CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से इनकार, वीडियो में जाने सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि "कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता" और नई भाषाओं का अध्ययन विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक हो सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर केंद्र सरकार और CBSE से 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
2026-27 सत्र से लागू हुई नई नीति
CBSE ने मौजूदा 2026-27 शैक्षणिक सत्र से नई तीन-भाषा नीति लागू की है। इस नीति के तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य किया गया है।नई व्यवस्था के कारण कई छात्रों को वह भाषा छोड़नी पड़ रही है, जिसे वे कक्षा 5 से लगातार पढ़ते आ रहे थे। इसी प्रावधान को लेकर कई अभिभावकों और याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या उठाए सवाल?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी किए बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। उनका दावा है कि देश के कई स्कूलों में नई भाषाओं के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है।इसके अलावा, पर्याप्त पाठ्यपुस्तकें, अध्ययन सामग्री और आवश्यक शैक्षणिक ढांचा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नई नीति का सीधा असर छात्रों और शिक्षकों पर पड़ रहा है और पढ़ाई में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल तीन-भाषा नीति पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने कहा कि नई भाषा सीखना छात्रों के लिए लाभकारी हो सकता है और भाषाई ज्ञान भविष्य में उपयोगी साबित होता है।हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि यदि नीति के क्रियान्वयन में वास्तविक समस्याएं हैं, तो उनका समाधान किया जाना जरूरी है। इसी कारण केंद्र सरकार और CBSE को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
29 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और CBSE को 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। इसके बाद 29 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें नीति के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद CBSE की तीन-भाषा नीति 2026-27 सत्र में लागू रहेगी, जबकि इसके व्यावहारिक पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की आगामी सुनवाई के बाद सामने आ सकता है।

