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Supreme Court: एसिड अटैक रोकने की गाइडलाइन पर सवाल, केंद्र से मांगा जवाब; राज्यों में सख्ती बढ़ाने के निर्देश

Supreme Court: एसिड अटैक रोकने की गाइडलाइन पर सवाल, केंद्र से मांगा जवाब; राज्यों में सख्ती बढ़ाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने देश में एसिड अटैक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि बिक्री पर नियंत्रण के लिए गाइडलाइन जारी होने के बावजूद ऐसे अपराध सामने आ रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मौजूदा व्यवस्था में कमियां हैं और नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी राज्यों में एसिड की बिक्री पर रोक से जुड़ी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करे और इस संबंध में हलफनामा दाखिल कर जरूरी कदमों की जानकारी दे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि एसिड अब भी बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।

केंद्र की जवाबदेही पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार केवल गाइडलाइन जारी करके अपनी जिम्मेदारी राज्यों पर नहीं छोड़ सकती। उसे यह भी देखना होगा कि निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या उसने एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर किसी राज्य से जवाब मांगा है।

पीठ ने सवाल किया कि क्या केंद्र ने ऐसा कोई सर्कुलर जारी किया, जिसमें राज्यों से पूछा गया हो कि नियमों के बावजूद एसिड अटैक की घटनाएं कैसे हो रही हैं। अदालत ने निगरानी करने वाली एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल सहानुभूति जताने वाले शब्दों में निर्देश जारी करने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। यदि घटनाएं जारी हैं, तो मौजूदा नीति और उसके क्रियान्वयन की कमियों की समीक्षा करना जरूरी है।

राज्यों में नियम लागू करने की प्रक्रिया कमजोर

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को बताया कि एसिड की खुदरा बिक्री पर नियंत्रण के लिए राज्यों को विस्तृत गाइडलाइन भेजी गई थी। उनके मुताबिक, राज्यों ने इस संबंध में नियम भी बनाए हैं, लेकिन उनका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है।

इस पर अदालत ने कहा कि गाइडलाइन में मौजूद कमियों का गलत फायदा उठाया जा रहा है। केंद्र और राज्यों को आपसी तालमेल के साथ इन कमियों को दूर करना चाहिए, ताकि एसिड की अवैध बिक्री और उसके दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

एसिड अटैक के मामलों में सजा बढ़ाने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी एसिड अटैक की घटनाओं और इन अपराधों की गंभीरता पर चिंता जता चुका है। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे मामलों में सजा बढ़ाने के विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया था। सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी सामने आया था कि आरोपी पर अपनी बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी डालने जैसे कानूनी बदलावों पर विचार किया जाए।

यह मामला एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि वे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

NCRB के आंकड़े: 2023 में पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा मामले

उपलब्ध NCRB आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में एसिड अटैक के करीब 200 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 57 मामले सामने आए। इसी वर्ष 16 मामलों में आरोपियों को सजा हुई, जबकि 27 मामलों में आरोपी बरी हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले के लंबे समय से लंबित रहने पर भी चिंता जताई थी। अदालत के समक्ष बताया गया था कि एसिड अटैक से जुड़ा एक मामला 16 साल से लंबित है।

वास्तविक आंकड़ों को लेकर भी चिंता

एसिड अटैक के मामलों में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक घटनाओं की संख्या के बीच अंतर होने की आशंका जताई जाती रही है। कुछ संगठनों का दावा है कि सामाजिक दबाव, डर और अन्य कारणों से कई घटनाएं सामने नहीं आ पातीं। हालांकि, वास्तविक मामलों की संख्या और रिपोर्ट न होने वाली घटनाओं के अनुपात की पुष्टि के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि एसिड की बिक्री पर नियंत्रण के नियमों को जमीन पर किस तरह प्रभावी बनाया जाए। अब केंद्र सरकार को अदालत में यह बताना होगा कि राज्यों में गाइडलाइन के पालन, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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