TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, वीडियो में जाने 4 महीने में फैसला करना होगा
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘फूल-पत्ती’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समय-सीमा तय कर दी। कोर्ट ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया को चार महीने में पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विवाद के निपटारे तक ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था।
चुनाव आयोग ने मांगा था 6 महीने का समय
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से विवाद के निपटारे के लिए छह महीने का समय मांगा गया था। आयोग ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, हलफनामे और दोनों पक्षों की ओर से पेश किए जाने वाले सबूतों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की मांग स्वीकार नहीं की और आयोग को तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया।कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें और जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद तीन महीने की अवधि में चुनाव आयोग को मामले पर अंतिम निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।
उपचुनाव के बीच विवाद ने पकड़ा जोर
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद ऐसे समय में चल रहा है, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव निर्धारित हैं। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों को फिलहाल अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा उपचुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया है।चुनाव आयोग का विवाद पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण से जुड़ा है। आयोग को दोनों पक्षों के दावों और उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच के बाद फैसला करना है। यह प्रक्रिया चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत हो रही है।
शिवसेना और NCP विवाद का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े पुराने विवादों में हुई देरी का मुद्दा भी सामने आया। शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद लंबे समय तक चला था। इसी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़ा विवाद भी पार्टी के अलग-अलग गुटों के दावों से संबंधित रहा है।TMC मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है। पहले दोनों गुटों को चार सप्ताह में चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी और उसके बाद आयोग को तीन महीने में विवाद पर अपना निर्णय देना होगा।

