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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली को कानून के विपरीत माना, मौजूदा डीजीपी को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली को कानून के विपरीत माना, मौजूदा डीजीपी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली को कानून के विपरीत माना, मौजूदा डीजीपी को नोटिस

नई दिल्ली/रांची, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली के एक प्रावधान को प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के ‘ प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में तय कानून के सीधे विपरीत माना है। अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार की संबंधित नियमावली को रद्द किया जाता है तो मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी रद्द की जाएगी। हालांकि, अदालत ने डीजीपी तदाशा मिश्र को नोटिस जारी करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर झारखंड की ‘डीजीपी और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति विनियमन, 2025’ की वैधता को चुनौती दी है। यह नियम 8 जनवरी 2025 को अधिसूचित किया गया था। केंद्र का आरोप है कि इसे सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना बनाया गया और इसमें प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार की ओर से झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली को चुनौती दिए जाने पर सवाल उठाया। सिब्बल ने पूछा कि जब अन्य राज्यों में भी इसी तरह के नियम हैं तो केंद्र केवल झारखंड के नियमों को ही क्यों चुनौती दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में तो इससे भी अधिक गंभीर प्रावधान हैं। इस पर केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र किसी एक राज्य को चुनकर कार्रवाई नहीं कर रहा है। यदि दूसरे राज्यों में भी ऐसे नियम हैं तो उन्हें भी हटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से झारखंड सरकार को लगातार बताया गया है कि डीजीपी की नियुक्ति में राज्य सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन कर रहा है। केंद्र ने झारखंड के पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया है। अनुराग गुप्ता को 2 फरवरी 2025 को डीजीपी नियुक्त किया गया था जबकि उस समय उनकी सेवा में करीब तीन महीने ही शेष थे और वह 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को डीजीपी नियुक्त किया गया था। इससे एक दिन पहले, 29 दिसंबर को राज्य सरकार ने नियम में संशोधन कर डीजीपी नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम शेष सेवा की शर्त हटा दी थी।

तदाशा मिश्रा की निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2025 को थी। केंद्र ने इसी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संबंधित प्रावधान प्रथम दृष्टया प्रकाश सिंह मामले में तय कानून के सीधे विपरीत प्रतीत होता है। अदालत ने कहा कि यदि नियम निरस्त किया जाता है तो तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी रद्द करनी पड़ सकती है। इसलिए अदालत ने उन्हें मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर देना उचित समझा और झारखंड सरकार को उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने इस बीच राज्य सरकार को संबंधित नियम पर दोबारा विचार करने की छूट दी है। राज्य चाहे तो अपना जवाब दाखिल कर सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद की तारीख निर्धारित की है। इस दौरान तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने और झारखंड सरकार को संबंधित नियम पर जवाब देने का अवसर रहेगा।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम

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