सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ज्ञानवापी विवाद में 14 जुलाई को शुरू होगी मध्यस्थता प्रक्रिया
वाराणसी, 12 जुलाई (आईएएनएस)। ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले को मध्यस्थता (मेडिएशन) के जरिए सुलझाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस संबंध में 14 जुलाई को मध्यस्थता की तारीख तय की गई है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के वादी और अधिवक्ता शामिल होंगे।
मामले से जुड़े अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों का मध्यस्थता के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है। ज्ञानवापी से जुड़े सात पत्रावलियों के संबंध में 9 जुलाई को सभी पक्षों को सूचना दी गई थी और अब 14 जुलाई को दोनों पक्षों को बुलाया गया है।"
उन्होंने कहा, "यदि मध्यस्थता की प्रक्रिया सफल होती है तो ज्ञानवापी से जुड़े सभी लंबित मुकदमों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। मध्यस्थता में दोनों पक्ष अपनी बात रखेंगे और आपसी बातचीत के आधार पर समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा।"
हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया है कि यदि मुस्लिम पक्ष बिना शर्त मंदिर सौंपने के लिए सहमत होता है तो मध्यस्थता को सफल माना जाएगा। हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई सर्वे के दौरान मंदिर से संबंधित पर्याप्त प्रमाण मिले हैं। अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि तीन महीने तक चले एएसआई सर्वे में मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई है और उनका पक्ष है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ढांचे पर किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि मंदिर पक्ष को सौंप दिया जाता है तो वे दूसरे पक्ष पर किसी प्रकार की सजा या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे। हालांकि यदि समाधान नहीं निकलता है तो मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
अधिवक्ता ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकालना होता है। इसमें पक्षकार अपनी सहमति से किसी निष्कर्ष तक पहुंचते हैं और उसके आधार पर अदालत आगे का आदेश पारित कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल विशेष आदेश पारित करने की प्रक्रिया पर रोक है और जिला स्तर पर न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के प्रतिनिधि, वक्ता और अन्य संबंधित लोग मौजूद रहेंगे।
ज्ञानवापी मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इससे जुड़े कई मुकदमों में अलग-अलग स्तरों पर सुनवाई चल रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मध्यस्थता के जरिए समाधान की कोशिश को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
--आईएएनएस
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