पारिवारिक विवादों पर बोले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अंजारिया, वीडियो में कहा- कोर्ट का समाधान कई बार पक्षों को ‘थोपा हुआ न्याय’ लगता है
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी अंजारिया ने पारिवारिक विवादों के समाधान को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अदालतों से मिलने वाले समाधान कई बार संबंधित पक्षों को वास्तविक या संतोषजनक नहीं लगते। कुछ पक्षों को महसूस होता है कि उन पर न्याय थोपा गया है। ऐसी स्थिति में उन्हें मिला समाधान उनके लिए भ्रम जैसा हो सकता है और आगे चलकर अन्याय की भावना पैदा कर सकता है।
जस्टिस अंजारिया गुवाहाटी में आयोजित ईस्टर्न जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ‘फैमिली विवादों में ADR बनाम न्यायिक फैसला: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर अपने विचार रखे।
पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता पर जोर
जस्टिस अंजारिया ने पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि परिवार से जुड़े विवाद केवल कानूनी अधिकारों और दावों तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनमें मानवीय भावनाएं, रिश्ते और संवेदनशीलता भी जुड़ी होती है।उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में केवल अदालत का फैसला सुना देना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात समझने और आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने का अवसर मिलता है। इससे कई मामलों में रिश्तों को बनाए रखने की संभावना भी बनी रहती है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान जस्टिस अंजारिया ने भारत की पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “भारत के संस्कार और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भूलिए। अब हम एक परिवार को भी एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने बदलते सामाजिक माहौल और परिवारों के सामने बढ़ती चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि परिवारों के बीच होने वाले विवादों में समाधान ऐसा होना चाहिए, जिससे केवल कानूनी विवाद समाप्त न हो, बल्कि मानवीय संबंधों को भी बचाने की कोशिश हो।
ADR और न्यायिक फैसले पर चर्चा
सम्मेलन में वैकल्पिक विवाद समाधान यानी ADR के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसमें मध्यस्थता समेत अदालत के बाहर विवादों के समाधान के तरीकों और पारिवारिक मामलों में उनकी उपयोगिता पर विचार किया गया।जस्टिस अंजारिया ने इस बात पर जोर दिया कि पारिवारिक विवादों की प्रकृति अन्य कानूनी विवादों से अलग होती है। पति-पत्नी, माता-पिता, बच्चों और अन्य रिश्तेदारों से जुड़े मामलों में भावनात्मक पहलू महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विवादों के समाधान की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और संवाद को भी जगह मिलनी चाहिए।उन्होंने कहा कि परिवारों से जुड़े मामलों में समाधान खोजते समय केवल कानूनी अधिकारों को देखने के बजाय रिश्तों और मानवीय भावनाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

