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सुप्रीम कोर्ट ने छठी कक्षा के छात्रों को दी राहत, वीडियो में जाने 2027 से लागू होगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने छठी कक्षा के छात्रों को दी राहत, वीडियो में जाने 2027 से लागू होगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि छठी कक्षा के छात्रों को फिलहाल इस नीति के तहत तीसरी भाषा की अनिवार्यता से राहत दी जाए। यह आदेश 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा। यानी अगले शैक्षणिक सत्र में छठी कक्षा में पहुंचने वाले छात्रों को तीन-भाषा नीति के इस प्रावधान से छूट मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो छात्र छठी कक्षा में पढ़ रहे हैं, उन्हें तीसरी भाषा के विषय में पास या फेल नहीं किया जाएगा। ऐसे छात्रों को केवल अपीयरेंससर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

अचानक भाषा बदलने से छात्रों को परेशानी: सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच CBSE के तीन-भाषा फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि छठी कक्षा के छात्रों के लिए अचानक नई भाषा को अपनाना कठिन हो सकता है।कोर्ट का कहना था कि छात्रों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय और उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

केंद्र ने पहले छूट देने से किया था इनकार

मामले में पहले केंद्र सरकार ने छठी कक्षा के छात्रों को तीन-भाषा नीति से छूट देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा के छात्रों को पहले ही इस मामले में राहत दी जा चुकी है।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब छठी कक्षा के छात्रों को भी राहत मिल गई है। कोर्ट ने आदेश को लागू करने के लिए 2027 की समयसीमा तय की है, जिससे स्कूलों और छात्रों को तैयारी का समय मिल सके।

27 राज्यों के बोर्ड में लागू है नीति

तीन-भाषा फॉर्मूला देश के कई राज्यों के स्कूल बोर्डों में लागू है। जानकारी के अनुसार, 27 राज्यों के स्कूल बोर्ड इस नीति का पालन कर रहे हैं। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं सीखने का प्रावधान है, जिसमें क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी समेत अन्य भाषाएं शामिल हो सकती हैं।हालांकि, तमिलनाडु राज्य स्कूल बोर्ड इस नीति का लंबे समय से विरोध करता रहा है। तमिलनाडु में वर्ष 1968 से तीन-भाषा फॉर्मूले को लेकर अलग रुख अपनाया गया है।

भाषा नीति को लेकर जारी है बहस

तीन-भाषा नीति को लेकर देश में लंबे समय से बहस चलती रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे छात्रों को कई भाषाएं सीखने का अवसर मिलता है, जबकि विरोध करने वाले पक्ष भाषा चयन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद CBSE से जुड़े लाखों छात्रों और स्कूलों को राहत मिली है। अब 2027 से लागू होने वाले बदलावों को लेकर बोर्ड और स्कूलों को नई व्यवस्था तैयार करनी होगी।

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