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26 जनवरी पर सम्मान, अगले ही दिन नोटिस: चार जिलों के हॉस्पिटल अधीक्षकों से मांगा गया जवाब

26 जनवरी पर सम्मान, अगले ही दिन नोटिस: चार जिलों के हॉस्पिटल अधीक्षकों से मांगा गया जवाब

गणतंत्र दिवस के मौके पर सम्मानित किए गए अधिकारियों को अगले ही दिन नोटिस मिलने से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। 26 जनवरी को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मान पाने वाले चार जिलों के हॉस्पिटल अधीक्षकों से स्वास्थ्य विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम ने सम्मान प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई की टाइमिंग पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, जिन हॉस्पिटल अधीक्षकों को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सम्मानित किया गया था, उन पर अपने-अपने जिलों के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थागत खामियों, लापरवाही और तय मानकों के पालन में कमी के आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हालिया निरीक्षण और प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सम्मान और जवाबदेही—दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

नोटिस में अधीक्षकों से अस्पतालों में स्टाफ की कमी, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, साफ-सफाई और रिकॉर्ड में अनियमितताओं को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर दिया गया सम्मान पूर्व में किए गए कार्यों और उपलब्धियों के आधार पर होता है, जबकि नोटिस हाल की रिपोर्टों और फील्ड से आई शिकायतों के आधार पर जारी किए गए हैं। विभाग के मुताबिक, प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गलतियों पर कार्रवाई जरूरी है, चाहे संबंधित अधिकारी सम्मानित ही क्यों न रहे हों।

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर कर्मचारी संगठनों और कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि गंभीर खामियां थीं, तो सम्मान से पहले उनकी जांच होनी चाहिए थी। सम्मान के ठीक अगले दिन नोटिस जारी करना अधिकारियों का मनोबल गिराने वाला कदम माना जा रहा है। वहीं, कुछ लोग इसे सख्त प्रशासन और जवाबदेही की मिसाल भी बता रहे हैं।

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर सम्मान प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार किसी को भी जवाबदेही से ऊपर नहीं मानती।

कुल मिलाकर, 26 जनवरी के सम्मान के बाद अगले ही दिन जारी हुए नोटिस ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें हॉस्पिटल अधीक्षकों के जवाब और स्वास्थ्य विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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