सुखदेव भगत ने प्रह्लाद जोशी पर राहुल-प्रियंका गांधी की टिप्पणी को सही बताया, कहा-सार्वजनिक जीवन में मर्यादा जरूरी
नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ चर्चा, आरएसएस को लेकर प्रियांक खड़गे के दावे पर और प्रह्लाद जोशी पर राहुल और प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, "जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में होता है, तो हम उम्मीद करते हैं कि उसका राजनीतिक आचरण और सार्वजनिक बयान गरिमा और मर्यादा के दायरे में रहें। हालांकि, जिस तरह से उन्होंने रेप पीड़िता के मामले में असहमति जताई और दोषियों की रिहाई से जुड़े फैसले का स्वागत किया, वह उनके चरित्र, मानसिकता और महिलाओं के प्रति उनके रवैये को दर्शाता है। इससे एक खास समुदाय के प्रति उनका नजरिया भी साफ पता चलता है। इसीलिए कल प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी ने इन मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया।"
कॉक्रोच जनता पार्टी के दोबारा आंदोलने की चेतावनी पर सुखदेव भगत ने कहा, "यह कोई चेतावनी नहीं थी। उन्होंने अपनी बात बहुत साफ तौर पर रखी। मैं आज फिर से यह कहना चाहता हूं कि पिछले दो सालों से राहुल गांधी लगातार देश के युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते रहे हैं। हमने इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन भी किए हैं। आज भी अगर युवा सरकार पर भरोसा नहीं करते हैं, तो इसकी वजह सरकार की नीतियां हैं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, सिर्फ किसी व्यक्ति को बदलने से काम नहीं चलेगा, जरूरत सिस्टम में बदलाव की है।"
प्रियांक खड़गे के आरएसएस को लेकर किए गए दावे पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, "आप ऐतिहासिक तथ्यों से इनकार नहीं कर सकते। प्रियंका खड़गे ने जो बातें कही हैं, वे तथ्यों के आधार पर सही हैं, उनमें कुछ भी गलत नहीं है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि उन्होंने 'भारत छोड़ो आंदोलन' का विरोध किया था। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी सच है कि उन्होंने लंबे समय तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने संविधान का विरोध किया और उसे स्वीकार नहीं किया, और इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जिन लोगों के इतिहास में स्वतंत्रता आंदोलन और भारत के संविधान का विरोध शामिल रहा है, उन्हें हमें देशभक्ति पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ऐसे लोगों का देशभक्ति के बारे में बात करना और हमें उसका पाठ पढ़ाने की कोशिश करना, इससे अधिक विडंबनापूर्ण या विरोधाभासी बात शायद ही कुछ हो सकती है।"
--आईएएनएस
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