सुखबीर सिंह बादल पर हमले की एनआईए जांच की मांग, हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री को लिखा पत्र
नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर 13 अगस्त को हुए जानलेवा हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग उठी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले और 4 दिसंबर 2024 को हुए पहले हमले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है।
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि नांदेड़ साहिब में गुरु घर में मत्था टेकने के बाद बाहर निकलते समय एक हमलावर ने तलवार से सुखबीर सिंह बादल पर हमला किया। हमले का उद्देश्य उनकी हत्या करना था। इस दौरान सुखबीर सिंह बादल के दाहिने हाथ में चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए।
हरसिमरत कौर ने कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर में भी सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ था, जब वे श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशानुसार सेवा कर रहे थे। उन्होंने दोनों घटनाओं के बीच कई समानताओं की ओर इशारा करते हुए आशंका जताई कि दोनों हमले आपस में जुड़े हो सकते हैं।
पत्र में पंजाब पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि 2024 में हुए पहले हमले के आरोपी के उग्रवादी संबंधों और सुखबीर बादल को दी गई धमकियों की जानकारी होने के बावजूद उसे हरमंदिर साहिब परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने और सुखबीर बादल तक पहुंचने दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि हमले से पहले कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आरोपी के बीच करीबी संबंधों को दर्शाने वाली तस्वीरें और घटनाएं भी सामने आई थीं, जिससे पुलिस की संभावित लापरवाही या मिलीभगत को लेकर संदेह पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि इन सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
हरसिमरत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के हमले के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार हमले के तुरंत बाद कुछ अधिकारियों द्वारा ऐसे बयान दिए गए, जिनसे हमलावर के बजाय पीड़ित पर ही सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के बयान प्रारंभिक स्तर पर दर्ज नहीं किए गए, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
सांसद ने अपने पत्र में चिंता जताई कि राजनीतिक और धार्मिक आधार पर हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुरु घरों जैसी पवित्र धार्मिक स्थलों पर बार-बार होने वाली हिंसक घटनाएं न केवल सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि पंजाब और देश की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र रहा है। ऐसे में यदि किसी प्रकार के उग्रवादी, अंतरराज्यीय या विदेशी नेटवर्क की भूमिका है, तो उसकी व्यापक जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार इन घटनाओं को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।
हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री से आग्रह किया कि 13 अगस्त 2026 और 4 दिसंबर 2024 की दोनों घटनाओं की एनआईए द्वारा जांच कराई जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दोनों हमले किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान या झूठा फंसाया नहीं जाना चाहिए तथा सच्चाई सामने लाकर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब और देश किसी भी स्थिति में 1980 और 1990 के दशक जैसे हिंसक दौर की पुनरावृत्ति का जोखिम नहीं उठा सकते। इसलिए राजनीतिक या धार्मिक प्रेरित हिंसा तथा हत्या के प्रयासों के प्रति शून्य सहिष्णुता अपनाना आवश्यक है।
--आईएएनएस
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