मैसूर सिल्क साड़ी की ऐसी दीवानगी, सुबह 4 बजे से टोकन लेकर कतार में खड़ी महिलाएं, वायरल हुआ VIDEO
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें हज़ारों औरतें सुबह 4 बजे से लंबी लाइनों में खड़ी हैं। वजह सरकारी फॉर्म नहीं, बल्कि असली मैसूर सिल्क साड़ियां हैं। वीडियो कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्री की असलियत दिखाता है, जहां डिमांड आसमान छू रही है और सप्लाई लिमिटेड है।
सुबह 4 बजे से मैसूर सिल्क के लिए लाइन में
Women queue up from 4.00 AM outside a Karnataka Soviet (sorry Silk) Industries Corporation showroom to buy silk sarees starting from ₹23,000 and going up to ₹250,000. Only 1 saree per customer and you need a token to be in the queue.
— Rakesh Krishnan Simha (@ByRakeshSimha) January 20, 2026
There is an ongoing shortage (or more… pic.twitter.com/d100w3hql0
वीडियो में औरतें सुबह 4 बजे से कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम के बाहर लाइन में लगी दिख रही हैं। वीडियो के साथ कैप्शन में बताया गया है कि साड़ियों की कीमत ₹23,000 से ₹250,000 के बीच है। हर कस्टमर को सिर्फ़ एक साड़ी दी जा रही है, और खरीदने के लिए एक टोकन ज़रूरी है। X पर @ByRakeshSimha नाम के यूज़र ने यह वीडियो शेयर किया है, जिसे अब तक 100,000 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है।
मैसूर सिल्क साड़ियों की इतनी कमी क्यों है?
असल में, असली मैसूर सिल्क साड़ियों की सप्लाई में 2025 से ही भारी कमी चल रही है, और 2026 तक भी इसके खत्म होने का कोई संकेत नहीं है। इसके कई कारण हैं: KSIC के पास ट्रेंड बुनकरों की संख्या सीमित है। एक कारीगर को एक साड़ी पूरी करने में छह से सात महीने लगते हैं। प्रोडक्शन सरकारी ट्रेंड वर्कफोर्स तक ही सीमित है। शादियों के मौसम, वरलक्ष्मी पूजा, गौरी-गणेश और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान डिमांड तेज़ी से बढ़ती है। ऐसे में, शोरूम का स्टॉक कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है।
नकली सिल्क का डर और सरकारी भरोसा
कई यूज़र्स ने कमेंट्स में प्राइवेट कंपनियों पर सवाल उठाए हैं। एक यूज़र ने लिखा, “कुछ असली खरीदार हैं, जबकि कुछ स्टोर मालिक अपने कर्मचारियों को थोक खरीदारी के लिए भेजते हैं।” दरअसल, प्राइवेट सेक्टर में नकली या चीनी आर्टिफिशियल सिल्क बेचने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। तिरुपति मंदिर में भक्तों को नकली सिल्क सप्लाई करने का मामला इसका उदाहरण है। यही वजह है कि KSIC साड़ियों पर ज़्यादा भरोसा किया जाता है, क्योंकि सिर्फ़ वहीं आपको GI टैग वाला असली मैसूर सिल्क मिल सकता है।

