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सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थेः सीडीएस

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थे। इसके साथ ही नेताजी एक दूरदर्शी राजनेता और एक साहसी और कुशल सैन्य कमांडर भी थे, जिनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर यह बात चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कही।
सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थेः सीडीएस

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारत के एकमात्र सच्चे राजनीतिक-सैन्य नेता थे। इसके साथ ही नेताजी एक दूरदर्शी राजनेता और एक साहसी और कुशल सैन्य कमांडर भी थे, जिनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर यह बात चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कही।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद रहे। यह कार्यक्रम नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। जनरल अनिल चौहान ने यहां उद्घाटन व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने नेताजी को भारत का एकमात्र सच्चा राजनीतिक-सैन्य नेता बताते हुए कहा कि नेताजी न केवल एक दूरदर्शी राजनेता थे, बल्कि एक साहसी और कुशल सैन्य कमांडर भी थे, जिनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय है।

सीडीएस ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) पर भी बात की। उन्होंने आईएनए की उन सैन्य उपलब्धियों पर विशेष प्रकाश डाला, जिनका उल्लेख अपेक्षाकृत कम किया जाता है। उन्होंने कहा कि आईएनए ने तोपखाने, बख्तरबंद वाहन और पारंपरिक सैन्य समर्थन के अभाव के बावजूद उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह सफलता केवल सैनिकों की अटूट देशभक्ति, दृढ़ संकल्प और मातृभूमि के प्रति निस्वार्थ समर्पण का परिणाम थी। उन्होंने इसे नेताजी के प्रेरक नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता का जीवंत उदाहरण बताया। अपने व्याख्यान में जनरल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, उपनिवेशवाद, औपनिवेशिक मानसिकता और कॉग्निटिव कॉलोनियलिज्म जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल भौतिक नवाचार ही नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में नवाचार भी उतना ही आवश्यक है। इस संदर्भ में उन्होंने नेताजी के विचारों और दृष्टि को प्रासंगिक बताते हुए युवाओं और नीति-निर्माताओं से पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने का आह्वान किया। व्याख्यान के दौरान बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य, युद्ध के उभरते नए क्षेत्र, विघटनकारी प्रौद्योगिकियां तथा उनसे निपटने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।

यहां इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्तता, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय सेना ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत उभरते डिजिटल सूचना परिदृश्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक प्रणाली विकसित की जाएगी।

यह पहल सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से साकार की जाएगी। इस परियोजना में एक स्वदेशी स्टार्टअप इंडी एस्ट्रा की भी भागीदारी होगी। इस पहल के माध्यम से संस्थागत अनुभवों, शैक्षणिक विशेषज्ञताओं और भारतीय उद्योगों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मनिर्भरता व क्षमता विकास को मजबूती देना है। गौरतलब है कि आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण जॉइंटनेस और नवाचार के अनुरूप है। यह पहल भविष्य की चुनौतियों के लिए भारत की रक्षा तैयारियों को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीएससी

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