छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, वीडियो में जाने सुप्रीम कोर्ट, पुलिस कार्रवाई पर निष्पक्ष जांच के दिए संकेत
छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो वह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे मामलों में आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता दिखाई देती है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस कार्रवाई से जुड़े मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा और उन्हें समय के अनुरूप अपडेट किए जाने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से उन प्रदर्शनकारियों को राहत देने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। अदालत ने कहा कि जिन नाबालिग प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट ने कहा कि नाबालिगों के मामलों में कानून के अनुरूप संवेदनशीलता और विशेष प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।अदालत ने कहा कि वर्ष 2018 में पुलिस कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण को लेकर जो दिशा-निर्देश तय किए गए थे, अब यह समीक्षा करने का समय आ गया है कि वे2026 की परिस्थितियों में कितने प्रभावी हैं। पीठ ने कहा कि बदलते समय और नई चुनौतियों को देखते हुए इन नियमों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि कहीं प्रदर्शन शुरू होता है, तो पुलिस के लिए स्पष्ट और अद्यतन स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल होना चाहिए। इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।अदालत की इस टिप्पणी को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और नागरिक स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है, वहीं पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए संयमित और कानूनी तरीके से कार्रवाई करना है।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब जांच प्रक्रिया और पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अदालत के अंतिम आदेश से यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका और जवाबदेही तय करने के लिए कौन से नए मानक अपनाए जाएंगे।

