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Student Mental Health: 9% छात्रों ने बताई बार-बार आत्महत्या की सोच, 34% ने कैंपस में खुद को माना बाहरी
 

Student Mental Health: 9% छात्रों ने बताई बार-बार आत्महत्या की सोच, 34% ने कैंपस में खुद को माना बाहरी

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित National Task Force (NTF) के सर्वे में कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं. 2.43 लाख से अधिक छात्रों के जवाबों पर आधारित इस सर्वे में करीब 9% छात्रों ने बताया कि उन्हें पिछले एक साल में अक्सर या बहुत अधिक आत्महत्या के विचार आए. वहीं, करीब 34% छात्रों ने किसी न किसी स्तर पर अपने कैंपस में खुद को बाहरी महसूस करने की बात कही.
हालांकि, टास्क फोर्स से जुड़े अधिकारियों ने इन आंकड़ों को अभी प्रारंभिक माना है, क्योंकि मौजूदा सैंपल पूरे देश के उच्च शिक्षा छात्रों का प्रतिनिधि सैंपल नहीं है. NTF की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है.
15% छात्रों ने लंबे समय तक तनाव और एंग्जाइटी की बात कही
सर्वे में करीब 15% छात्रों ने बताया कि पिछले छह महीनों में ऐसा दौर आया, जब वे कई हफ्तों तक बहुत ज्यादा तनाव, लो मूड या एंग्जाइटी से जूझते रहे. वहीं, 9% छात्रों ने पिछले एक साल में अक्सर या बहुत अधिक आत्महत्या के विचार आने की बात कही.
सर्वे में शामिल छात्रों में करीब 67% SC, ST और OBC वर्गों से थे. इसके अलावा 56% छात्रों ने कहा कि गंभीर मामलों को निष्पक्ष तरीके से संभालने के लिए उन्हें अपने संस्थान के प्रशासन पर भरोसा है. करीब 32% छात्रों ने बताया कि उनके संस्थान में काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
कैंपस में अकेलेपन और संस्थागत सपोर्ट पर भी सवाल
NTF के निष्कर्षों में छात्रों की मानसिक सेहत को केवल व्यक्तिगत समस्या के तौर पर नहीं देखा गया है. रिपोर्ट से जुड़े निष्कर्षों में सामाजिक भेदभाव, अकादमिक दबाव, करियर और रोजगार की चिंता तथा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं.
NTF के पहले के काम में यह भी सामने आया था कि बड़ी संख्या में उच्च शिक्षण संस्थानों में पूर्णकालिक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, टास्क फोर्स का गठन छात्रों की आत्महत्या के कारणों की पहचान करने और उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया गया था.


11 साल में उच्च शिक्षा में बढ़ा नामांकन
सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए NTF के विश्लेषण के मुताबिक, देश में उच्च शिक्षा का विस्तार पिछले वर्षों में तेजी से हुआ है. 2001-02 में उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या करीब 88 लाख थी, जो 2021-22 में बढ़कर 4.32 करोड़ से अधिक हो गई. इस विस्तार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों की संख्या भी बढ़ी है.
छात्र आत्महत्या के व्यापक आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2013 में 8,423 छात्र आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं, जबकि 2023 में यह संख्या 13,892 तक पहुंच गई.
IIT Bombay के छात्र की मौत के बाद भी उठे सवाल
छात्रों की मानसिक सेहत का मुद्दा हाल में IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद भी चर्चा में आया. रिपोर्टों के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को सेकेंड ईयर के छात्र की हॉस्टल में मौत हुई थी. उनकी मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन मिलने की घटना का भी जिक्र सामने आया है. मामले के बाद कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुए और छात्र के परिवार की ओर से आरोप भी लगाए गए हैं. इन आरोपों और घटना की परिस्थितियों की जांच अलग स्तर पर चल रही है.
NTF की अंतिम रिपोर्ट पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में 12 सदस्यीय National Task Force का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. रवींद्र भट कर रहे हैं. टास्क फोर्स ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और उच्च शिक्षण संस्थानों से जानकारी जुटाई है. अब सर्वे और अन्य इनपुट के आधार पर तैयार होने वाली अंतिम रिपोर्ट में छात्र आत्महत्या रोकने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सिफारिशें सामने आने की उम्मीद है.

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