PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा पर सख्त संसदीय समिति, वीडियो में जाने निशिकांत दुबे बोले- 'मार्क जुकरबर्ग माफी मांगें, नहीं तो सेफ हार्बर खत्म'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और संसदीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। कम्युनिकेशन और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से जुड़ी संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनी माफी नहीं मांगती है, तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाले "सेफ हार्बर" संरक्षण पर पुनर्विचार किया जा सकता है। निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा कि संसदीय समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। उनके मुताबिक, पिछले महीने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाया जाना एक गंभीर मामला है और इस पर कंपनी को स्पष्ट जवाब देना होगा।
23 जुलाई को हटाया गया था वीडियो
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक के मुद्दे पर एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीर चुनौती बताया था।बताया गया कि यह वीडियो फेसबुक से रात करीब साढ़े 12 बजे से सुबह 5 बजे तक हट गया था। बाद में इसे दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया।
मेटा ने बताया तकनीकी त्रुटि
वीडियो हटने के बाद मेटा ने सफाई देते हुए कहा था कि यह किसी नीति के तहत नहीं हटाया गया था, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि (Technical Error) के कारण ऐसा हुआ। कंपनी के अनुसार, समस्या का पता चलते ही वीडियो को दोबारा रिस्टोर कर दिया गया।हालांकि, संसदीय समिति इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रही है। निशिकांत दुबे का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण सार्वजनिक संदेश का हटना सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।
'सेफ हार्बर' पर दी चेतावनी
निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि मेटा इस मामले में माफी नहीं मांगता है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले "सेफ हार्बर" संरक्षण पर कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।सेफ हार्बर प्रावधान के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे कानून के निर्धारित नियमों का पालन करें।
मामले पर बढ़ सकती है बहस
प्रधानमंत्री का वीडियो हटने और उसके बाद हुई बहाली को लेकर अब यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल मंचों की नीतियों पर नई बहस का कारण बन गया है। फिलहाल मेटा ने इसे तकनीकी गलती बताया है, जबकि संसदीय समिति इस मामले में और जवाबदेही तय करने की बात कर रही है।

