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Startup Culture: कॉलेज के 22% छात्र शुरू कर चुके हैं अपना बिजनेस, IIT मंडी की रिपोर्ट में सामने आई युवाओं की बदलती सोच

Startup Culture: कॉलेज के 22% छात्र शुरू कर चुके हैं अपना बिजनेस, IIT मंडी की रिपोर्ट में सामने आई युवाओं की बदलती सोच

भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं के बीच स्टार्टअप और खुद का कारोबार शुरू करने का रुझान बढ़ रहा है। अब बड़ी संख्या में छात्र नौकरी को करियर का एकमात्र विकल्प मानने के बजाय उद्यमिता की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। IIT मंडी की GUESSS India 2025 National Survey Report के मुताबिक, भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के करीब 22 प्रतिशत छात्र पहले ही किसी न किसी रूप में अपना बिजनेस शुरू कर चुके हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 23 प्रतिशत के करीब है।

रिपोर्ट में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25,783 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि युवा केवल बिजनेस शुरू करने का सपना ही नहीं देख रहे, बल्कि अपने विचारों को कारोबार में बदलने की कोशिश भी कर रहे हैं।

43% छात्र भविष्य में शुरू करना चाहते हैं बिजनेस

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के करीब 43 प्रतिशत छात्र भविष्य में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि युवाओं के बीच उद्यमिता को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।

पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद बिजनेस शुरू करने की इच्छा रखने वाले छात्रों का अनुपात भी बढ़ा है। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट में सरकारी नौकरी और बड़ी कंपनियों में काम करने की इच्छा में कमी आने की बात भी सामने आई है।

कॉलेज में ही बिजनेस से कमाई कर रहे छात्र

सर्वे में शामिल छात्र उद्यमियों में से 35.5 प्रतिशत ने बताया कि उनके कारोबार से नियमित बिक्री हो रही है। यह वैश्विक स्तर पर दर्ज 33 प्रतिशत के आंकड़े से अधिक है।

इससे संकेत मिलता है कि कई छात्र पढ़ाई के दौरान ही अपने बिजनेस आइडिया को बाजार तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। हालांकि, किसी कारोबार की वास्तविक सफलता का आकलन उसकी बिक्री के साथ लागत, मुनाफे और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता से भी किया जाता है।

असफलता के बाद दोबारा कारोबार शुरू करने का जज्बा

रिपोर्ट में छात्र उद्यमियों की दोबारा शुरुआत करने की क्षमता भी सामने आई है। इसके मुताबिक, करीब 41 प्रतिशत छात्र उद्यमी पहले कोई बिजनेस बंद करने के बाद फिर से कारोबार शुरू कर चुके हैं। वहीं, लगभग 42 प्रतिशत छात्र उद्यमी एक से अधिक बिजनेस चला रहे हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि युवा कारोबारी अपने अनुभवों से सीखकर नए अवसर तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। उद्यमिता में जोखिम और असफलता की संभावना बनी रहती है, लेकिन सही योजना और बाजार की समझ से आगे बढ़ने के अवसर भी मिल सकते हैं।

AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी में सबसे ज्यादा दिलचस्पी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आईटी और डिजिटल टेक्नोलॉजी छात्र उद्यमियों के लिए आकर्षक क्षेत्र बन रहे हैं। इन क्षेत्रों में नए कारोबार शुरू करने को लेकर युवाओं की दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में संचालित छात्र कारोबारों में डिजिटल श्रेणी की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। इससे संकेत मिलता है कि तकनीकी क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों को अपने आइडिया को व्यावसायिक रूप देने के लिए बेहतर मार्गदर्शन, संसाधन और बाजार तक पहुंच की जरूरत हो सकती है।

परिवार और दोस्तों का नेटवर्क भी अहम

किसी छात्र के आसपास मौजूद उद्यमियों का उसके करियर संबंधी फैसलों पर प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन छात्रों के परिवार, दोस्तों, सहपाठियों या शिक्षकों के नेटवर्क में कोई उद्यमी मौजूद है, उनके बिजनेस शुरू करने की संभावना उन छात्रों के मुकाबले तीन गुना अधिक है, जिनके संपर्क में कोई उद्यमी नहीं है।

इससे कॉलेजों में मेंटरशिप कार्यक्रम, सफल स्टार्टअप संस्थापकों के साथ संवाद और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसरों की अहमियत सामने आती है।

बिजनेस शुरू करने में महिलाओं के सामने चुनौतियां

रिपोर्ट में महिला और पुरुष छात्रों के बीच उद्यमिता से जुड़े अंतर का भी जिक्र किया गया है। उद्यमी बनने की इच्छा रखने वाली महिलाओं में करीब 45 प्रतिशत ने वास्तव में बिजनेस शुरू किया, जबकि पुरुषों में यह अनुपात 53 प्रतिशत रहा।

यह अंतर बताता है कि बिजनेस शुरू करने की इच्छा को वास्तविक कारोबार में बदलने के लिए वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और परिवार व संस्थान का सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।

युवाओं में बदल रही है करियर की परिभाषा

GUESSS India 2025 की रिपोर्ट के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं के बीच उद्यमिता को लेकर रुचि बढ़ रही है। कॉलेजों में पढ़ाई के साथ बिजनेस शुरू करने वाले छात्र रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी योगदान दे सकते हैं।

हालांकि, स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अच्छा आइडिया पर्याप्त नहीं है। बाजार की मांग, वित्तीय प्रबंधन, ग्राहक अनुभव और सही रणनीति भी जरूरी हैं। ऐसे में कॉलेजों में उद्यमिता से जुड़ी शिक्षा और व्यावहारिक सहयोग युवाओं को अपने विचारों को टिकाऊ कारोबार में बदलने में मदद कर सकते हैं।

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