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श्रीनगर में शी-लाइफ पर परामर्श कार्यशाला, ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन में उद्यमी बनाने पर मंथन

श्रीनगर में शी-लाइफ पर परामर्श कार्यशाला, ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन में उद्यमी बनाने पर मंथन
श्रीनगर में शी-लाइफ पर परामर्श कार्यशाला, ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन में उद्यमी बनाने पर मंथन

श्रीनगर, 22 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत पशुपालन और कृषि उद्यमों में स्वयं-सहायता उद्यमी (शी-लाइफ) पर श्रीनगर में परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्व-सहायता समूह उद्यमियों को खेती और पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ाने में मदद दिलाना है।

डॉ. राजेश्वरी ने आईएएनएस से कहा, "शी लाइफ पर परामर्श कार्यशाला का आयोजन 24 सितंबर तक चलेगा। इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी बनाना है। कार्यशाला में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप सशक्त बनाने के लिए मंथन किया जाएगा। महिलाओं को खेती से जुड़ी उद्यमी बनाने और उनकी मदद के लिए कार्यशाला में चर्चा की जाएगी। इस कार्यशाला में कई राज्यों के लोग आए हुए हैं। कार्यशाला में आए लोग ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे और पता करेंगे कि क्या परेशानी और कमियां सामने आ रही हैं।"

डॉ. राजेश्वरी ने कहा, "ग्रामीण महिलाएं बहुत संपन्न हैं और उनमें काम करने की लगन होती है। इन महिलाओं को सिर्फ मार्गदर्शन करने की जरूरत होती है। हम ग्रामीण महिलाओं को कैसे पशुपाल और कृषि क्षेत्र में उद्यमी बना पाएं, यही कार्यशाला का मकसद है। इस कार्यशाला में हमारी कोशिश रहेगी कि एक गाइडलाइन बना सकें, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में मदद करे।"

डॉ. राजेश्वरी ने कहा, "जम्मू-कश्मीर में 96 हजार स्वयं सहायता समूह के जरिए 8.50 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। हम स्वयं सहायता समूह के जरिए ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचते हैं और उनको योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं।"

कार्यक्रम में मौजूद एक महिला अधिकारी ने कहा, "अभी तक हमने 87 लाख उद्यमी तैयार किए हैं। भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ाने का उद्देश्य है। अभी तक 3 करोड़ लखपति दीदी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। इस लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।"

--आईएएनएस

ओपी/एबीएम

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