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स्पेस में इमरजेंसी के लिए कैसे तैयार होते हैं एस्ट्रोनॉट्स, जानें क्या है 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो'

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। स्पेस में किसी भी मिशन के दौरान आपातकालीन स्थिति आ सकती है। ऐसे में ये सवाल आम है कि ऐसी परिस्थितियों के लिए एस्ट्रोनॉट्स को कैसे तैयार किया जाता है? भारतीय वायुसेना के कैप्टन व एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला का एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें वह इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते नजर आए।
स्पेस में इमरजेंसी के लिए कैसे तैयार होते हैं एस्ट्रोनॉट्स, जानें क्या है 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो'

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। स्पेस में किसी भी मिशन के दौरान आपातकालीन स्थिति आ सकती है। ऐसे में ये सवाल आम है कि ऐसी परिस्थितियों के लिए एस्ट्रोनॉट्स को कैसे तैयार किया जाता है? भारतीय वायुसेना के कैप्टन व एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला का एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें वह इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते नजर आए।

उन्होंने बताया कि एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आपात स्थितियों से निपटने का अभ्यास है। शुभांशु शुक्ला के अनुसार, एस्ट्रोनॉट्स अपना लगभग 80 प्रतिशत समय सही-सही मिशन की रिहर्सल में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों की तैयारी में बिताते हैं जब चीजें गलत हो जाएं। एयरोस्पेस की भाषा में इसे ‘ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो’ कहा जाता है। इसका मतलब है- “जब सब कुछ योजना के अनुसार न चले तो क्या करना है।”

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर सबसे गंभीर आपात स्थितियां आग लगने या जहरीली गैस रिसाव की होती हैं। इनसे निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को विस्तृत और व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाती है। सबसे पहले नियम है – खुद को सुरक्षित करें। अगर एस्ट्रोनॉट खुद असुरक्षित है तो वह दूसरों की मदद नहीं कर सकता। एक स्वस्थ और सक्षम एस्ट्रोनॉट पूरे क्रू को बचाने में मदद कर सकता है।

शुभांशु शुक्ला वीडियो में इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क पहनकर दिखाते नजर आए। उन्होंने बताया, यह मास्क तब काम आता है जब स्पेस स्टेशन में जहरीली गैस रिसाव हो। यह मास्क देखने में साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन इसकी डिजाइन पूरी तरह व्यावहारिक है। तनाव की स्थिति में यह आसानी से फूल जाता है।

उन्होंने हवाई जहाज की सुरक्षा घोषणा का उदाहरण देते हुए कहा कि “पहले खुद का ऑक्सीजन मास्क लगाएं, फिर दूसरों की मदद करें” वाली सलाह सिर्फ प्लेन के लिए नहीं है। यह सिद्धांत पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी लागू होता है। अंतरिक्ष मिशन बेहद जटिल होते हैं। छोटी-सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को बार-बार ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि असली संकट में वे शांत रहकर सही फैसले ले सकें।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

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