सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि, राम मंदिर चढ़ावा चोरी में दोषियों को मिले सजा: लोकेश मुनि
नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य लोकेश मुनि ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने, राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले और विश्व शांति के महत्व पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जीवन सर्वोपरि है और कानून के दायरे में रहकर हर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के मुद्दे पर आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि उनके स्वास्थ्य को लेकर पूरे देश में चिंता का माहौल था। न्यायालय ने भी इस विषय पर चिंता व्यक्त की थी और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सरकार ने आवश्यक कदम उठाए। किसी भी व्यक्ति के प्राण अत्यंत मूल्यवान होते हैं और सोनम वांगचुक देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं। इसलिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना आवश्यक था। मुझे विश्वास है कि वह शीघ्र स्वस्थ होकर फिर से लोकतंत्र को मजबूत करने, देश को दिव्य और भव्य बनाने, राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने के कार्य में योगदान देंगे। हम सभी भारतीयों का एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि भारत को और अधिक गौरवशाली बनाया जाए।
राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि देश में संविधान और कानून की मजबूत व्यवस्था मौजूद है। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है और इसकी जांच जारी है। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाए, उसे किसी भी परिस्थिति में बचाया नहीं जाना चाहिए। दोषियों को सिर्फ जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि किसी ने चढ़ावे की राशि या संपत्ति का दुरुपयोग किया है तो उसकी पूरी रिकवरी भी होनी चाहिए। बड़े से बड़े दोषी को भी कठोर से कठोर सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और भारत की सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक हैं। इसलिए राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को उचित दंड मिलेगा।
विश्व शांति और गांधी मंडेला फाउंडेशन द्वारा आयोजित मंडेला डे कार्यक्रम का जिक्र करते हुए आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि आज पूरी दुनिया में सबसे बड़ी आवश्यकता शांति की है। युद्ध, हिंसा और आतंकवाद किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं, क्योंकि हिंसा केवल प्रतिहिंसा को जन्म देती है। संवाद और वार्ता के माध्यम से हर विवाद का समाधान संभव है। 'पीस थ्रू डायलॉग' यानी संवाद के जरिए शांति स्थापित करने का मार्ग ही सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है।
आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि विश्व शांति से पहले व्यक्ति के मन की शांति आवश्यक है। यदि मन अशांत रहेगा तो समाज और विश्व में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकती।
--आईएएनएस
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