सोनम वांगचुक को एनकाउंटर का डर, वीडियो में जाने अमित शाह के इस्तीफे की मांग; लेह हिंसा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा
लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को एक कार्यक्रम में वांगचुक ने आशंका जताई कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से उन्हें किसी एनकाउंटर में मारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर धमकियां मिली हैं। इसी कार्यक्रम में उन्होंने पिछले साल की लेह हिंसा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
वांगचुक ने लेह हिंसा की न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो स्वतंत्र 'पीपुल्स ट्रिब्यूनल' बनाकर पुलिस फायरिंग और हिंसा की जांच कराई जाएगी।
'एनकाउंटर में मारे जाने का डर'
वांगचुक ने कहा कि उन्हें ऐसी चेतावनियां मिली हैं कि उन्हें एनकाउंटर में मारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो देश को लद्दाख की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश को जगाने में मदद मिलती है तो वह किसी भी नतीजे का सामना करने के लिए तैयार हैं।यह बयान उन्होंने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा की पहली बरसी के मौके पर दिया। उस हिंसा में पुलिस कार्रवाई के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग
वांगचुक ने कहा कि पिछले साल के आंदोलन के दौरान हुई मौतों की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लद्दाख में जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी चाहिए।यह वांगचुक की राजनीतिक मांग और आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों को स्वीकार किए जाने की जानकारी नहीं है।
किस मुद्दे को लेकर हुआ था आंदोलन?
24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। इसी दौरान लेह में हिंसा भड़क गई और पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई।हिंसा की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत की जांच के लिए केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में न्यायिक जांच का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएस चौहान को सौंपी गई थी।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
वांगचुक का कहना है कि घटना को एक साल पूरा होने के बावजूद न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि रिपोर्ट को लोगों के सामने रखा जाए, ताकि घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।लद्दाख प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, न्यायिक आयोग को 24 सितंबर 2025 की घटना के दौरान पैदा हुई कानून-व्यवस्था की स्थिति, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत से जुड़े मामलों की जांच का जिम्मा दिया गया था।
'पीपुल्स ट्रिब्यूनल' बनाने की चेतावनी
वांगचुक ने कहा कि यदि न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है तो एक स्वतंत्र 'पीपुल्स ट्रिब्यूनल' गठित कर पुलिस फायरिंग की जांच की जाएगी। उन्होंने घटना की जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।उधर, केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में वांगचुक की NSA के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया था। गृह मंत्रालय ने उस समय कहा था कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के साथ संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।

