Samachar Nama
×

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: जामनगर के काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों के अखंड मंत्रोच्चारण

गांधीनगर, 10 जनवरी (आईएएनएल)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत गुजरात के जामनगर शहर के ऐतिहासिक एवं पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चार का भव्य तथा दिव्य आयोजन किया गया है। 10 जनवरी तक मंदिर में सत्संग, भजन, महाआरती तथा मंत्रोच्चार सहित आयोजन किए गए हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: जामनगर के काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों के अखंड मंत्रोच्चारण

गांधीनगर, 10 जनवरी (आईएएनएल)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व अंतर्गत गुजरात के जामनगर शहर के ऐतिहासिक एवं पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चार का भव्य तथा दिव्य आयोजन किया गया है। 10 जनवरी तक मंदिर में सत्संग, भजन, महाआरती तथा मंत्रोच्चार सहित आयोजन किए गए हैं।

इस अनुष्ठान के दौरान विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सतत वैदिक मंत्रोच्चार किया जा रहा है, जिससे समग्र मंदिर परिसर भक्ति, शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बना है। मंत्रोच्चार के साथ-साथ हर दिन शाम को महाआरती का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपस्थित रहकर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। 'ओम नमः शिवाय' की धुन से सत्संग के दौरान समग्र वातावरण आध्यात्मिक बना।

सत्संग कार्यक्रम के आयोजन में विधायक दिव्येशभाई अकबरी, उप महापौर कृष्णाबेन सोढा, स्थायी समिति के अध्यक्ष नीलेशभाई कथगरा, अग्रणी बीनाबेन कोठारी, पार्षदगण आदि अग्रणी तथा भक्तगण उपस्थित रहकर सहभागी हुए।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में किया जा रहा है। यह आयोजन जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

इस आयोजन की परिकल्पना विनाश के स्मरण के रूप में नहीं, बल्कि सहनशीलता, विश्वास और सभ्यतागत आत्म-सम्मान को श्रद्धांजलि के रूप में की गई है। सदियों से, सोमनाथ को बार-बार उन आक्रमणकारियों द्वारा निशाना बनाया गया जिनका उद्देश्य भक्ति के बजाय विनाश था। हालांकि, हर बार देवी अहिल्या बाई होल्कर जैसे भक्तों के सामूहिक संकल्प के माध्यम से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। पुनरुद्धार के इस अटूट चक्र ने सोमनाथ को भारत की सभ्यतागत निरंतरता का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया।

1026 का वर्ष उस समय के भी 75 साल पूरे होने का अवसर है, जब स्वतंत्रता के बाद 11 मई, 1951 को मौजूदा सोमनाथ मंदिर को भक्तों के लिए फिर से खोला गया था। ये दोनों अहम पड़ाव सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आधार बने हैं।

चार दिवसीय पर्व के दौरान, सोमनाथ आध्यात्मिक गतिविधियों, सांस्कृतिक चिंतन और राष्ट्रीय स्मरण के केंद्र में परिवर्तित हो गया है। इस उत्सव की एक मुख्य विशेषता 72 घंटे का अखंड ओंकार जाप है, जो एकता और सामूहिक विश्वास का प्रतीक है। इसके साथ ही, पूरे मंदिर परिसर और नगर में भक्ति संगीत, आध्यात्मिक विमर्श और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

Share this story

Tags