सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों के बरी होने के खिलाफ याचिका खारिज की
मुंबई, 7 मई (आईएएनएस)। देश के सबसे चर्चित और विवादित एनकाउंटर मामलों में शामिल सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में 22 पुलिस अधिकारियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अनखड़ की डबल बेंच ने गुरुवार को खुली अदालत में यह फैसला सुनाया।
यह अपील सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन की तरफ से दायर की गई थी। उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें गुजरात और राजस्थान पुलिस के 22 अधिकारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
गौरतलब है कि यह मामला साल 2005 में सामने आया था, जब सोहराबुद्दीन शेख की गुजरात पुलिस द्वारा कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी का अपहरण किया गया था। बाद में सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार दिया गया और उसकी पत्नी कौसर बी का आज तक कोई पता नहीं चल पाया। वहीं, उसके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी एक साल बाद कथित एनकाउंटर में मौत हो गई थी।
इस मामले ने उस समय देशभर में भारी राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी थी। जांच की जिम्मेदारी बाद में सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान सीबीआई ने गुजरात और राजस्थान पुलिस के कई बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। कुल 38 आरोपियों में से 16 पहले ही बरी हो चुके थे। बाद में जिन 22 पुलिसकर्मियों पर ट्रायल चला, उन्हें भी विशेष अदालत ने बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।
वहीं, रूबाबुद्दीन शेख के वकील गौतम तिवारी ने बताया, " बॉम्बे हाईकोर्ट ने हमारी अपील को खारिज कर दिया है। हालांकि यह एक ऑपरेटिव आर्डर आया है और अभी तक हमें ग्राउंड्स नहीं पता है। डिटेल ऑर्डर आने के बाद पता चलेगा कि किस वजह से इसे खारिज किया गया। आगे सुप्रीम कोर्ट जाना है या नहीं इस बारे में हम उनसे बात कर आगे बढ़ेंगे क्योंकि उनके परिवार ने भी इतने सालों में बहुत कुछ झेला है।"
--आईएएनएस
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