रतलाम के पंचेवा गांव में प्रेम विवाह पर सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार, प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पंचेवा गांव से चिंता की खबर आई है। यहां प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों और उनके सहयोगियों के खिलाफ चौपाल में सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे परिवारों को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाएगा और उन्हें जरूरी सरकारी सेवाओं से भी वंचित रखा जाएगा।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और वीडियो की सत्यता की पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह घटना सच पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संविधान विशेषज्ञ इस निर्णय को गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहते हैं कि प्रेम विवाह पर किसी के साथ सामाजिक बहिष्कार और सरकारी सेवाओं से वंचित करना मौलिक अधिकारों का हनन है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19 के तहत विवाह और जीवन जीने की स्वतंत्रता हर नागरिक को प्राप्त है।
वकीलों का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत आज़ादी का सवाल नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों से जुड़ा है। प्रशासन की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रेम विवाह को लेकर बने सामाजिक दबाव और जमीनी स्तर पर मानवाधिकारों की अनदेखी को उजागर करती है। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपील की है कि ऐसे मामलों में प्रशासन और कानून दोनों की तुरंत हस्तक्षेप करना आवश्यक है।

