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डॉ. राजेंद्र रूपनावर आत्महत्या मामला: रोहित पवार ने की एसआईटी जांच, 1 करोड़ मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग

डॉ. राजेंद्र रूपनावर आत्महत्या मामला: रोहित पवार ने की एसआईटी जांच, 1 करोड़ मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग
डॉ. राजेंद्र रूपनावर आत्महत्या मामला: रोहित पवार ने की एसआईटी जांच, 1 करोड़ मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग

मुंबई, 1 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता रोहित पवार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने डॉ. राजेंद्र रूपनावर के आत्महत्या मामले में रिएक्शन दिया। उनके मुताबिक, वो बहुत ही सामान्य परिवार से आते थे। सरकारी कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद राजेंद्र रूपनावर डॉक्टर बने थे। वो जल्द ही एमडी का भी एग्जाम देने वाले थे। वह लोगों की सेवा करना चाहते थे, लेकिन एक दिन वहां पर किसी बड़े नेता का पीए और सिक्योरिटी गार्ड आया और डॉक्टर पर प्रमाणपत्र देने के लिए दबाव बनाने लगा। नियमों की अवहेलना होने की वजह से प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता था। इस वजह से उनका इगो हर्ट हो गया और वह डॉक्टर को धमकी देने लगा। इससे डॉ. राजेंद्र रूपनावर भावनात्मक रूप से काफी विचलित हो गए थे। इससे पहले जुलाई में भी डॉक्टर ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन, लोगों ने उन्हें रोक लिया। दो तीन दिन पहले भी उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी। इस बार भी उन्हें बचाने की कोशिश की गई थी लेकिन, चिकित्सकीय उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

उन्होंने कहा कि हमने डॉक्टर के परिजनों से जाकर मुलाकात की, तो हमें बताया गया कि प्राथमिकी में आरोपी कोंडे देशमुख का नाम शामिल नहीं है। इसके अलावा, सिक्योरिटी ऑफिसर के नाम का भी जिक्र नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया है। जिस तरह की न्याय व्यवस्था मौजूदा समय में है, उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि हम आरोपी को किसी भी कीमत पर कानून के जंजीरों से बचने नहीं देंगे। हम सरकार से मांग करते हैं कि परिजनों को एक करोड़का मुआवजा और परिवार में से किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही, जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए कि वो 10 साल तक सलाखों से बाहर न आए। मामले की जांच के लिए एसआईटी का भी गठन होना चाहिए। रोहित पवार ने ये भी कहा कि इससे पहले भी कई मामलों की जांच के लिए कई एसआईटी का गठन हो चुका है, लेकिन उसकी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई।

रोहित पवार ने कहा कि अब हमारी यही मांग है कि इस मामले में एसआईटी का गठन किया जाए और मामले की जांच के लिए दो महीने का समय दिया जाना चाहिए, ताकि सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाए। इतना पढ़ने के बावजूद भी अगर किसी पर अत्याचार होता है, वो भी सिर्फ इसलिए कि वो गरीब है, तो यह गलत है।

मुंबई के हॉस्पिटल में बुर्का विवाद को लेकर भी रोहित पवार ने अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, अभी हम डॉ. राजेंद्र रूपनावर आत्महत्या प्रकरण की बात कर रहे हैं। जिन्होंने मानवता की सेवा के लिए सरकारी अस्पताल का चयन किया। ऐसी स्थिति में अगर ऐसे मुद्दे में उलझे रहे कि कौन अस्पताल में किस तरह को पोशाक पहनकर जा रहा है, तो मैं समझता हूं कि यह अर्थविहीन विषय है, जिस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए, चूंकि इस पर ध्यान देने से हमें किसी भी प्रकार का फायदा होने वाला नहीं है। इस भूमि में किसी भी आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। अफसोस की बात है कि इस सरकार में गरीबों के साथ लगातार शोषण हो रहा है। हमारे डॉक्टर के साथ शोषण हुआ, क्योंकि वो गरीब थे। राज्य में लगातार भेदभाव हो रहा है।

साथ ही, उन्होंने मनोज जरांगे को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, मनोज जरांगे एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने आज तक जो भी आंदोलन किया, वो अपनी सूजबूझ का सहारा लिया। अब वो आगे क्या करेंगे, वो उनकी व्यक्तिगत भूमिका में शामिल होगा। जल्द ही सरकार और उनके बीच में संवाद होगा। दोनों के बीच जो भी सार्वजनिक होगा, उसे बाद में लोगों के बीच में पेश किया जाएगा, ताकि आगे क्या रूपरेखा निर्धारित किया जाना है। उसके बारे में फैसला किया जा सके। अगर मराठा आरक्षण को लेकर जटिलताओं को कम करना है, तो उसके लिए आपको संसद का दरवाजा खटखटाना होगा। लेकिन, यह आंदोलन मनोज जरांगे का सामाजिक आंदोलन है।

वहीं, जीडीपी बढ़ने को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जीडीपी बढ़ने के कई कारण हैं। इसके पीछे इन्फलेशन भी एक कारण है। यह रियल जीडीपी नहीं, बल्कि सामान्य जीडीपी है। रियल जीडीपी की स्थिति बहुत खराब है। अगर किसी भी प्रकार का आंकड़ा लेकर सरकार की प्रशंसा की जाती है, तो यह गलत है। असलियत कुछ और है।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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