ट्रेन भी आखिरकार सार्वजनिक संपत्ति ही है। इसका निर्माण और रखरखाव आम जनता के टैक्स के पैसों से होता है, ताकि लोग सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा कर सकें। लेकिन दुख की बात यह है कि कुछ गैर-जिम्मेदार और असामाजिक तत्व इस साझा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आते। हाल ही में ऐसा ही एक मामला कमला इंटरसिटी एक्सप्रेस से सामने आया है, जहां स्लीपर कोच की हालत देखकर किसी का भी मन खिन्न हो जाए।
यात्रियों ने शिकायत की है कि स्लीपर कोच में सीटें टूटी हुई हैं, फर्श और दीवारें गंदी और जर्जर हैं, और सफाई का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया। कई यात्रियों का कहना है कि कोच में सफर करना केवल असुविधाजनक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया है। “स्लीपर कोच की हालत देखकर विश्वास ही नहीं होता कि यह सार्वजनिक संपत्ति है। यह काफी निराशाजनक है,” एक यात्री ने बताया।
This is the Kamla Ganga Intercity Express. Almost every seat in the coach has been slashed with blades and destroyed by anti-social elements.
— The Nalanda Index (@Nalanda_index) January 30, 2026
The irony is painful the very people who live in this country are the ones destroying it. Public property is not free loot; it is built… pic.twitter.com/yUUQn6LI22
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कमला इंटरसिटी एक्सप्रेस का नियमित निरीक्षण किया जाता है, लेकिन कुछ यात्रियों और गैर-जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा किया गया नुकसान इसे जल्दी खराब कर देता है। अधिकारी कहते हैं कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए समय-समय पर मरम्मत और सफाई कार्य किए जाते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले नुकसान से यह चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। ट्रेनों और रेलवे कोचों का दुरुपयोग न केवल सामान्य यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ाता है, बल्कि टैक्सपेयर्स के पैसों का भी नुकसान करता है। ऐसे में जनता की जागरूकता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं। लोग रेलवे प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं और यात्रियों से अपील कर रहे हैं कि वे सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करें। #PublicPropertyRespect और #TrainMaintenance जैसे हैशटैग्स के साथ लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
रेलवे विभाग ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्लीपर कोच की मरम्मत और साफ-सफाई के लिए तुरंत कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे कोच की स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी तरह के नुकसान की सूचना तुरंत दें।
कुल मिलाकर, कमला इंटरसिटी एक्सप्रेस का यह मामला यह याद दिलाता है कि ट्रेन जैसी सार्वजनिक संपत्ति सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। स्लीपर कोच की बदहाल हालत न केवल यात्रियों के अनुभव को खराब करती है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के महत्व को भी उजागर करती है। इसके सुधार और रखरखाव में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

