'उन्हीं के लोग एसआईटी में हैं', राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
लखनऊ, 15 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने राम मंदिर चढ़ावे मामले में चल रही एसआईटी जांच और ज्ञानवापी विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में ज्यादा उम्मीद नहीं है।
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी मामले में संभावित अंतिम रिपोर्ट को लेकर राजेंद्र पाल गौतम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "जांच के लिए गठित एसआईटी के सदस्यों की नियुक्ति उसी सरकार द्वारा की गई है, जिसके कार्यकाल में मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।"
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, "इस मामले के तार राजनीतिक संगठनों से जुड़े हुए हैं और ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है। जिन लोगों ने धर्म और भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया, अगर उन्हीं से जुड़े किसी मामले में चढ़ावे की चोरी का आरोप सामने आता है तो जनता निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करती है।"
ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता से समाधान नहीं निकलने पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा, "देश और संविधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में दिए गए भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि अंबेडकर ने धर्म को देश से ऊपर रखने और व्यक्ति पूजा को लेकर चेतावनी दी थी।
उन्होंने कहा कि आज देश के सामने वही चिंताएं दिखाई दे रही हैं, जिनका जिक्र अंबेडकर ने किया था। उनके अनुसार, संविधान की भावना के अनुरूप सभी धर्मों और समुदायों के बीच समानता और आपसी सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा, "भारत में लंबे समय तक हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं। जब से धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए बढ़ा है, तब से समाज में विवाद और दूरी बढ़ी है। किसी भी देश के लिए यह उचित नहीं है कि लोग एक-दूसरे को प्रेम और सम्मान की जगह नफरत की नजर से देखने लगे।"
--आईएएनएस
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