एसआईआर से लोग मतदान अधिकार से वंचित हुए, यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक : ओपी रावत
भोपाल/मुंबई, 27 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य मुद्दा आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों और उनके मताधिकार से जुड़े सवालों का है।
भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान ओपी रावत ने कहा कि बिहार से लेकर अब तक आम जनता को एसआईआर की प्रक्रिया के कारण कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दुर्भाग्य से कई लोग अपने वोट देने के अधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपील पर आए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में लोग अपने मताधिकार से वंचित हुए थे।
रावत ने कहा, "किसी भी लोकतंत्र के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है कि आपकी प्रक्रिया के कारण लोगों को वोट देने से रोक दिया जाए?"
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लेता है। यदि किसी मामले में बहुमत एक पक्ष के साथ होता, तो अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कोई निर्णय नहीं ले सकते थे। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में आयोग के अन्य सदस्यों का फैसला भी मान्य रहता।
वहीं, मुंबई में कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। पटेल ने कहा कि पूरे मामले से जुड़ी बातों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
पटेल ने कहा कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाना और उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान पर सीधा हमला है। पटेल ने कहा कि यह केवल कांग्रेस या इंडी गठबंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश की चिंता का विषय है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर भी पटेल ने राज्य सरकार से तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल राहत की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सहायता वास्तव में प्रभावित किसानों तक पहुंचे। पटेल ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए सूखा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की।
--आईएएनएस
एसएके/वीसी

