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SIR विरोध प्रदर्शन: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज, वीडियो में जाने अब भरना होगा 10 हजार का पीस बॉन्ड

SIR विरोध प्रदर्शन: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज, वीडियो में जाने अब भरना होगा 10 हजार का पीस बॉन्ड

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। नेहा बोरा ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपए का निजी बांड यानी पीस बॉन्ड भरने को कहा गया था। अब उन्हें यह बॉन्ड भरना होगा।

हालांकि, हाईकोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने 22 अक्टूबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

क्या है पूरा मामला?

नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली में मंडी हाउस से कनॉट प्लेस की ओर निकाले जा रहे मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम से जुड़ा था। अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को उन्हें रिहा कर दिया गया।इसके बाद 18 अक्टूबर को नेहा बोरा को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस मिला। इसमें उन्हें 10 हजार रुपए का निजी बांड भरने और शांति बनाए रखने के लिए कहा गया था। नेहा ने इस नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

नोटिस में क्या आरोप लगाए गए?

नोटिस में जंतर-मंतर के आसपास बार-बार होने वाले प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया था। इसमें कहा गया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जा चुका है।नोटिस के मुताबिक, नेहा बोरा पर आरोप था कि उन्होंने निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लोगों को कनॉट प्लेस जाने के लिए उकसाया। इसी आधार पर उनसे शांति बनाए रखने के लिए निजी बांड भरने को कहा गया था।यह मामला SIR के खिलाफ प्रदर्शन और उस जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बीच सामने आया। नेहा बोरा ने मजिस्ट्रेट के नोटिस को अदालत में चुनौती देकर इसे रद्द करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्हें 10 हजार रुपए का पीस बॉन्ड भरना होगा। हालांकि, अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।पीस बॉन्ड का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति से निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने का आश्वासन लेना होता है। इस मामले में मजिस्ट्रेट के नोटिस को चुनौती देने वाली नेहा की याचिका खारिज होने के बाद बॉन्ड भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

SIR विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला

नेहा बोरा की हिरासत और पीस बॉन्ड का मामला SIR के विरोध में हुए प्रदर्शन के संदर्भ में सामने आया है। 16 अक्टूबर को हुए मार्च के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था और रिहाई के अगले दिन नोटिस जारी किया गया था।फिलहाल, हाईकोर्ट के फैसले के बाद नेहा बोरा को निजी बांड भरना होगा। वहीं, अदालत के निर्देश के अनुसार संबंधित मजिस्ट्रेट को उन्हें मामले से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे।

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