एसआईआर के बाद एनआरसी लाने की तैयारी, जनता को परेशान कर रही सरकार : ओवैसी
हैदराबाद, 14 सितंबर (आईएएनएस)। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), सीएए-एनआरसी, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), वंदे मातरम विवाद, भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स सम्मेलन समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी को समानता के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जा रहा है।
ओवैसी ने कहा कि यूसीसी संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और अनुच्छेद 14, 25, 26 तथा 29 की भावना के खिलाफ है। भाजपा और आरएसएस हिंदू व्यक्तिगत कानूनों को गैर-हिंदू समुदायों पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विधि आयोग पहले भी कह चुका है कि यूसीसी न तो भारत के लिए आवश्यक है और न ही व्यावहारिक।
ओवैसी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है तो उसे गोवा में भी उसी स्वरूप में लागू करके दिखाना चाहिए। उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किए गए यूसीसी का जिक्र भी भाजपा गोवा में नहीं कर सकेगी। गोवा के सामाजिक और पारिवारिक कानूनों की स्थिति अलग है और अक्सर यूसीसी को लेकर जनता के सामने अधूरी जानकारी पेश की जाती है। सरकार रोजगार और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर मुसलमानों को निशाना बना रही है। देश में करोड़ों लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं और बड़ी संख्या में शिक्षित युवा बेरोजगार हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों के बजाय धार्मिक पहचान से जुड़े विषयों पर राजनीति कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों को लेकर लगातार विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
भारत-चीन संबंधों पर भी ओवैसी ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत कुछ ऐसे पेट्रोलिंग प्वाइंट्स खो चुका है जहां पहले भारतीय जवान नियमित रूप से गश्त किया करते थे। उनका आरोप था कि चीन द्वारा ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने के बावजूद भारत सरकार उसके साथ संबंधों को सामान्य बताने की कोशिश कर रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने सीएए, एनआरसी और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 2019 में सीएए और एनआरसी के खिलाफ पूरे देश में हुए प्रदर्शनों को लोग भूले नहीं हैं। एसआईआर की प्रक्रिया आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है और इसके पीछे भविष्य में एनआरसी लागू करने की मंशा हो सकती है। लोगों को दस्तावेज लेकर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वंदे मातरम विवाद पर भी ओवैसी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी गीत या विचार को लोगों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी व्यक्ति को उसकी आस्था के विरुद्ध जाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर भी ओवैसी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान डिजिटल करेंसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। यदि ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल मुद्रा व्यवस्था विकसित होती है तो सदस्य देश वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करते हुए आपसी व्यापार को और मजबूत बना सकते हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने के मुद्दे पर भी उन्होंने टिप्पणी की। ओवैसी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खानपान की विविधता को भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जो निर्णय लिया, वह उसका अधिकार है, लेकिन भारत की सांस्कृतिक और खाद्य विविधता को सामने लाने का अवसर बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता था।
--आईएएनएस
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