‘साहब! इतने ही हैं, बकरी बेच कर पैसा लाईं हूं’, रिश्वतखोर सिपाही का तब नहीं पसीजा दिल और कर दिया ये कांड़
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले की पुलिस एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह है एक सिपाही द्वारा खुलेआम महिला से रिश्वत मांगने का मामला। यह घटना न सिर्फ पुलिस विभाग की छवि को धूमिल कर रही है, बल्कि आम लोगों के बीच कानून के रखवालों पर से भरोसा भी उठाती नजर आ रही है। मामला तब और गंभीर हो गया जब महिला के साथ बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में दिखी पुलिस की असलियत
घटना इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के एनटीपीसी पुलिस चौकी की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सिपाही, जो पुलिस चौकी के सामने ही खड़ा है, एक महिला से रिश्वत के रूप में 10 हजार रुपये की मांग कर रहा है। महिला बार-बार अपनी मजबूरी का हवाला देते हुए कह रही है कि वह गरीब है और सिर्फ 5 हजार रुपये दे सकती है, क्योंकि उसने बकरी और छेगड़ी बेचकर यह रकम जुटाई है।
महिला कहती है, “साहब मैं गरीब महिला हूं, दस हजार कहां से दूंगी? बकरी बेच के पैसा लाई हूं, अभी इतना बड़ा ऑपरेशन कराई हूं, दया करिए।” इस पर सिपाही जवाब देता है, “इतना बड़ी चोरी है, हमको दया करना होता तो यहीं से छोड़ देते। अब हमको चोर बना देंगे।”
गेहूं चोरी में बना समझौते का खेल
मामला फरीदपुर गांव निवासी शेषमणि वर्मा के गेहूं चोरी से जुड़ा है। पुलिस को बगल के गांव शेख चिक के निवासी विपिन, जो कथित तौर पर हिस्ट्रीशीटर है, पर शक हुआ। पुलिस ने विपिन को जेल भेजने की धमकी दी और उसके परिवार से पैसे लेकर समझौते का दबाव बनाने लगी। जब परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पांच हजार रुपये देने की बात कही, तो पुलिस ने शांति भंग की आशंका में चालान कर दिया।
कार्रवाई: सिपाही सस्पेंड, चौकी प्रभारी लाइन हाजिर
वीडियो के वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी अंबेडकरनगर ने तत्काल रिश्वत मांगने वाले सिपाही को सस्पेंड कर दिया, जबकि पुलिस चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडे ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों की इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस की गिरती साख पर सवाल
अंबेडकरनगर की पुलिस पहले भी कई विवादों में रह चुकी है। कभी पब्लिक के साथ बदसलूकी, तो कभी पीआरडी जवान को पीटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब रिश्वतखोरी का यह मामला पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है। साथ ही, यह भी संकेत देती है कि जब तक भ्रष्ट तंत्र पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आम जनता न्याय और सुरक्षा की आस में ही ठगी जाती रहेगी।

