सिक्किम प्रकृति, संस्कृति और शासन के बीच सामंजस्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
गंगटोक, 16 मई (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को गंगटोक में आयोजित सिक्किम के 51वें राज्य स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने लोगों को शुभकामना देते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों में हिमालयी राज्य की यात्रा असाधारण रही है। एक छात्र के रूप में उन्होंने सिक्किम के भारत में विलय से संबंधित घटनाक्रमों को बारीकी से देखा था और आज 51वें राज्य स्थापना दिवस समारोह में उपस्थित होकर प्रसन्नता हो रही है।
सिक्किम को 'हरा-भरा, जैविक, स्वच्छ और साफ-सुथरा' बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम न केवल कृषि में जैविक है, बल्कि 'स्वभाव से भी जैविक' है। राज्य में अपनी सड़क यात्रा का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि सिक्किम के लोगों के अनुशासित और दयालु स्वभाव को देखा। उन्होंने आगे कहा कि अच्छे विचार और सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यक्ति और समाज दोनों को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि सिक्किम प्रकृति, संस्कृति और शासन के बीच सामंजस्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। राज्य स्थापना का 51वां वर्ष विकास, परिवर्तन और समावेशी प्रगति के एक नए चरण की शुरुआत करेगा।
सिक्किम के पहले मुख्यमंत्री काजी लेंडुप दोरजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें हमेशा एक दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने बुद्धिमत्ता, साहस और प्रतिबद्धता के साथ सिक्किम को एक ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन के दौर से गुजारा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में सिक्किम यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि 4,000 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं और जनता को समर्पित की गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट' के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और सिक्किम को उत्तर-पूर्व की 'अष्टलक्ष्मी' का अभिन्न अंग बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित है, जिसमें कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे। उन्होंने पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे और संपर्क को मजबूत करने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सराहना करते हुए क्षेत्र भर में रेलवे और हेलीपोर्ट सुविधाओं के विस्तार पर प्रकाश डाला। मिजोरम की अपनी हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क ने पूर्वोत्तर में व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है। सिक्किम को भी जल्द ही सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने का विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि इससे राज्य के जैविक उत्पादों को पूरे भारत के बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी और विकसित भारत 2047 में राज्य का योगदान मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में सिक्किम सरकार की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य सतत विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में उभरा है। सिक्किम 2016 में विश्व का पहला 100 प्रतिशत जैविक राज्य बना और 76,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को रसायन-मुक्त पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना केवल एक कृषि सुधार नहीं, बल्कि एक 'सांस्कृतिक क्रांति' है।
उन्होंने “मेरो रुख मेरो संताति” जैसी पहलों की सराहना की, जिसके तहत प्रत्येक नवजात शिशु के लिए 108 पेड़ लगाए जाते हैं। उन्होंने "शिशु समृद्धि योजना” की भी प्रशंसा की, जो बच्चों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें आध्यात्मिकता को सतत विकास से और पर्यावरण नेतृत्व को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
सिक्किम के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्य को राष्ट्र का रक्षक बताया। उन्होंने कहा कि समुदायों के बीच एकता, सहयोग की भावना और लोगों में देशभक्ति की गहरी भावना सिक्किम को भारत की अखंडता का मजबूत स्तंभ बनाती है।
उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत सिक्किम के 58 गांवों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। सीमावर्ती गांव अब 'अंतिम गांव' नहीं बल्कि 'भारत के पहले गांव' हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और शासन से संबंधित कई विकास परियोजनाओं की वर्चुअल आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया। इनमें रिम्बी-युक्सम सड़क का उन्नयन, एनएच-10 पर सुरक्षात्मक कार्य और पुल निर्माण, रंगपो खोला पर स्टील का पुल, बुरतुक हेलीपोर्ट का पुनर्निर्माण और उन्नयन, नामची के कामरंग सरकारी डिग्री कॉलेज में एक नया विज्ञान ब्लॉक और पाकयोंग के अरितार में एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उपराष्ट्रपति ने शासन और दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से सिक्किम उत्पाद शुल्क प्रबंधन प्रणाली का भी शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सरकार समर्थित उद्यमिता कार्यक्रम 'सिक्किम राइज' का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, वित्तपोषण और अवसंरचनात्मक सहायता के माध्यम से नवोन्मेषी विचारों को बड़े पैमाने पर विकसित होने योग्य व्यवसायों में परिवर्तित करना है। उन्होंने जैविक और सतत विकास में राज्य के नेतृत्व को और मजबूत करने के उद्देश्य से 'मिशन सिक्किम ऑर्गेनिक्स' का भी शुभारंभ किया।
उपराष्ट्रपति ने लेपचा, भूटिया और नेपाली समुदायों सहित विभिन्न समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाले एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी अवलोकन किया। सिक्किम की सांस्कृतिक विविधता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद की भावना के अंतर्गत विविध परंपराओं का संगम वास्तव में 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
--आईएएनएस
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