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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर अमित शाह ने किया याद, कहा- 'देश की एकता के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय'

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर अमित शाह ने किया याद, कहा- 'देश की एकता के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय'
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर अमित शाह ने किया याद, कहा- 'देश की एकता के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय'

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनसंघ के संस्थापक और राष्ट्रवादी विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। शाह ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'राष्ट्र प्रथम' के आदर्श को अपने जीवन का ध्येय बनाया। सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और देश की अखंडता के लिए उनका आजीवन संघर्ष युवाओं को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनका स्मरण कर नमन करता हूं। डॉ. मुखर्जी ने 'राष्ट्र प्रथम' के आदर्श को अपने जीवन का ध्येय बनाया। बंगाल के विभाजन के समय उनका दूरदर्शी नेतृत्व और जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और देश की अखंडता के लिए उनका आजीवन संघर्ष युवाओं को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।"

इसके साथ ही, अमित शाह ने अपना वीडियो संदेश भी शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा, "श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस राष्ट्र के बहुत बड़े नेताओं में शुमार होते हैं। उन्होंने कभी जीवन में कुछ भी प्रसिद्धि के लिए नहीं किया, मगर जो भी किया उसके दूरगामी परिणाम देश के लिए शुभांकर हुए। आजादी के पहले जब विभाजन हो रहा था, तब पश्चिम बंगाल भारत में रहे, अंग्रेजों के साथ लड़ाई करके श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सुनिश्चित किया था और इसी के कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना।"

गृह मंत्री ने कहा, "देश जब आजाद हुआ, तो कश्मीर में धारा 370 लागू की गई। कश्मीर का अलग राष्ट्रध्वज और अलग संविधान होता था। कश्मीर में एक अलग प्रधानमंत्री होते थे। यह संकल्पना भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत खतरनाक थी। तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक आंदोलन छेड़ा कि एक देश में 'दो विधान, दो निशान और दो प्रधान' नहीं रहेंगे। दिल्ली से लेकर कश्मीर तक वे मार्च लेकर गए। जहां कश्मीर की शुरुआत हुई, उनसे परमिट मांगा गया। उन्होंने कहा कि 'कश्मीर मेरे देश का हिस्सा है। मुझे किसी परमिट की जरूरत नहीं है।' वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में ही उनकी संदेहात्मक मृत्यु भी हुई।"

शाह ने आगे कहा, "आज श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्वप्न साकार हो चुका है। धारा 370 समाप्त हो चुकी है और उनकी बनाई हुई पार्टी भारतीय जनसंघ, जो अब भारतीय जनता पार्टी के नाम से जानी जाती है, गंगोत्री से लेकर बंगाल के गंगासागर तक भाजपा का राज है। लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं ने 60 साल के अंदर इनकी विचारधारा पर आगे बढ़ते हुए आज देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किया है। आज मैं हृदय से श्याम प्रसाद मुखर्जी के महान व्यक्तित्व को प्रणाम करके विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"

--आईएएनएस

डीसीएच/

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