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श्रावस्ती एयरपोर्ट के निर्माण में गड़बड़ी का आरोप, विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सीएम योगी से मांगी उच्चस्तरीय जांच

श्रावस्ती एयरपोर्ट के निर्माण में गड़बड़ी का आरोप, विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सीएम योगी से मांगी उच्चस्तरीय जांच
श्रावस्ती एयरपोर्ट के निर्माण में गड़बड़ी का आरोप, विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सीएम योगी से मांगी उच्चस्तरीय जांच

लखनऊ, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती हवाई अड्डे पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी और विमान परिचालन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हवाई अड्डे के निर्माण, मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने दावा किया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की की संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट में भी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। विधायक ने दोषी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई, जिम्मेदार ठेकेदार को काली सूची में डालने तथा विमान परिचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। गोंडा सदर से विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सात अक्टूबर को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि श्रावस्ती हवाई अड्डे के परिसर में बड़े पैमाने पर जलभराव, निष्क्रिय जल निकासी व्यवस्था, भवनों में सीलन और दरारों जैसी समस्याएं हैं।

उनके अनुसार, उनके प्रतिनिधि ने स्थल का निरीक्षण कर इन खामियों को देखा। कई स्थानों पर नालियों की दीवारें झुककर आपस में मिल गई हैं, जिससे जल निकासी बाधित हो रही है। परिसर में ऊंची घास और पानी जमा होने की स्थिति भी सामने आई है। विधायक ने पत्र में बताया कि हवाई अड्डे के भवनों का आईआईटी रुड़की से तृतीय पक्ष संरचनात्मक ऑडिट कराया गया था।

17 दिसंबर, 2025 की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। उनके अनुसार, रिपोर्ट में समग्र संरचनात्मक अस्थिरता नहीं पाए जाने के बावजूद वर्ष 2019 में निर्मित कुछ भवनों में गंभीर निर्माण संबंधी खामियां दर्ज की गई हैं। पत्र के मुताबिक, अग्निशमन केंद्र और विद्युत उपकेंद्र में निर्माण के महज छह साल के भीतर कंक्रीट के कार्बोनेशन का असर सरियों तक पहुंचने और उनमें जंग लगने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।

अग्निशमन केंद्र के कॉलमों में निर्धारित 40 मिलीमीटर के बजाय केवल 10 से 15 मिलीमीटर कंक्रीट आवरण होने का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा टर्मिनल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन में कंक्रीट की गुणवत्ता संबंधी खामियों, खुले सरियों में जंग और वॉटरप्रूफिंग में दरारों के कारण रिसाव की शिकायत की गई है। प्रतीक भूषण सिंह ने सबसे गंभीर सवाल स्वीकृत निर्माण अभिलेखों को लेकर उठाया है।

उन्होंने कहा कि बार-बार मांगने के बावजूद आईआईटी रुड़की को स्वीकृत संरचनात्मक ड्रॉइंग, डिजाइन बेसिस रिपोर्ट और गणना संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जो अभिलेख दिए गए, वे निर्मित भवनों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे में डिजाइन की समुचित जांच संभव नहीं हो सकी। विधायक ने सवाल किया कि यदि निर्माण के लिए ड्रॉइंग स्वीकृत थीं, तो उन्हें ऑडिट के दौरान उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया और निरीक्षण करने वाले अभियंताओं ने कथित खामियों को कैसे नजरअंदाज किया।

उन्होंने ऑडिट के दायरे से बाहर रहे कार्यों की स्थिति पर भी चिंता जताई। पत्र में लगभग पांच किलोमीटर लंबी परिधि दीवार के नीचे से नीलगाय, गाय और सियार जैसे पशुओं के रनवे क्षेत्र तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए वन्यजीवों से विमान के टकराने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा अग्निशमन भवन पर हाल में बना वॉच टावर तेज आंधी में क्षतिग्रस्त होने, भवन की दीवारों में दरारें आने और छत से पानी रिसने की शिकायत की गई है।

विधायक ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में व्यापक नवीनीकरण के बावजूद टर्मिनल भवन के लगभग सभी कक्षों की छतें टपकती हैं। इनमें सुरक्षा, संचार और निगरानी से जुड़े संवेदनशील कक्ष भी शामिल हैं, जिससे वहां स्थापित उपकरणों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। उन्होंने इन परिस्थितियों को निर्माण की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

मुख्यमंत्री से की गई मांगों में नागरिक उड्डयन विभाग से इतर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक समिति गठित करना प्रमुख है। इसमें स्वतंत्र संरचनात्मक विशेषज्ञों, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं और वित्त अधिकारियों को शामिल करते हुए 30 दिनों में जांच रिपोर्ट देने का सुझाव दिया गया है।

विधायक ने निर्माण से जुड़े अभिलेख सुरक्षित रखने, मरम्मत से पहले स्थलीय साक्ष्य दर्ज करने और जांच के दौरान कार्यदायी संस्था के बकाया भुगतान तथा प्रतिभूति राशि पर रोक लगाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमितता सामने आने पर मामला सतर्कता जांच के लिए भेजा जाए। दोषी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई, ठेकेदार को काली सूची में डालने और सरकारी धन के नुकसान की वसूली के साथ विमान परिचालन की सुरक्षा से जुड़े जरूरी सुधार तत्काल कराए जाएं।

--आईएएनएस

विकेटी/एएस

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